कोलकाता हिन्दी न्यूज | 12 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस की लगातार कमजोर होती स्थिति को लेकर अब पार्टी के अंदर से ही सवाल उठने लगे हैं।
नंदीग्राम के प्रभारी रह चुके TMC विधायक कुणाल घोष ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर निशाना साधते हुए आत्ममंथन की जरूरत बताई है। उनके बयान ने पार्टी के अंदर और राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
क्या कहा कुणाल घोष ने?
कुणाल घोष का कहना है कि नंदीग्राम में पार्टी की खराब स्थिति के लिए सिर्फ शुभेंदु अधिकारी को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की रणनीति को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन पार्टी की आंतरिक कमजोरियों को भी स्वीकार करना जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोलकाता में बैठे कुछ बड़े नेता यह मानकर चल रहे थे कि वे दूर बैठकर ही सभी जिलों की राजनीति को नियंत्रित कर सकते हैं।
स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और संगठन की अनदेखी पार्टी को भारी पड़ी। नंदीग्राम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जमीनी संगठन की मजबूती की जरूरत थी, लेकिन उस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
AIPAC और आत्ममंथन की बात
कुणाल घोष ने AIPAC का भी जिक्र किया और कहा कि नुकसान के कारणों को समझने के लिए आत्म-आलोचना और आत्म-विश्लेषण जरूरी है।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अपील की कि सिर्फ दोषारोपण करने के बजाय वास्तविक कारणों पर गौर किया जाए और भविष्य की रणनीति को उसी आधार पर तैयार किया जाए।
सियासी सवाल
अब सवाल यह है कि क्या नंदीग्राम में TMC की कमजोरी सिर्फ विपक्ष की रणनीति और शुभेंदु अधिकारी के प्रभाव का नतीजा है, या फिर पार्टी के अंदर की खींचतान, स्थानीय संगठन की अनदेखी और दूर से नियंत्रित करने की कोशिश भी इसकी बड़ी वजह है?
कुणाल घोष के इस बयान ने पश्चिम बंगाल की सियासत में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है। पार्टी के अंदर कई नेता और कार्यकर्ता अब इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि तृणमूल कांग्रेस इस आत्ममंथन की प्रक्रिया को कितनी गंभीरता से लेती है और नंदीग्राम जैसे क्षेत्रों में अपनी रणनीति में कितना बदलाव लाती है।
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