कोलकाता : बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई थी। मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस हिंसा की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के स्थानीय अधिकारियों की गंभीर लापरवाही बताई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य हमला 11 अप्रैल को हुआ था। उस समय स्थानीय पुलिस पूरी तरह से निष्क्रिय और अनुपस्थित थी। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि धुलियान शहर में हमलों को भड़काने में एक स्थानीय पार्षद ने अहम भूमिका निभाई थी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 17 अप्रैल को हिंसा से विस्थापित हुए लोगों की पहचान करने और उन्हें पुनर्वासित करने के लिए एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया था।
कमेटी में जोगिंदर सिंह (रजिस्ट्रार, लॉ, NHRC), सत्य अर्नब घोषाल (सदस्य सचिव, WBLSA), और सौगत चक्रवर्ती (रजिस्ट्रार, WBJS) शामिल थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य हमला 11 अप्रैल की दोपहर को हुआ था। एक स्थानीय पार्षद ने मुर्शिदाबाद के धुलियान शहर में हमलों का निर्देशन किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्थानीय पुलिस पूरी तरह से निष्क्रिय और अनुपस्थित थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों को विशेष पुनर्वास पैकेज की आवश्यकता है, और उचित सहायता और मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए मूल्यांकन विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए।
इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार ने डिवीजन बेंच को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। पिछली रिपोर्ट में वक्फ एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी 8 अप्रैल से 12 अप्रैल के बीच मुर्शिदाबाद में व्यापक भीड़ हिंसा का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ विरोध 4 अप्रैल को जांगीपुर पुलिस जिले के सभी पुलिस स्टेशन क्षेत्रों में शुरू हुआ था। इसमें कहा गया है कि पुलिस और नागरिक प्रशासन के हस्तक्षेप से सूती, धुलियान, समसेरगंज और जांगीपुर में स्थिति को अंततः नियंत्रण में लाया गया।
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