Mukul

दलबदल की राजनीति में माहिर रहे बंगाल के ‘चाणक्य’ मुकुल रॉय

कोलकाता, 23 फरवरी 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति के पर्दे के पीछे रहकर बड़े फैसले गढ़ने वाले, सत्ता के उतार-चढ़ाव को बेहद करीब से देखने वाले और कई राजनीतिक करवटों के साक्षी रहे मुकुल रॉय अब हमारे बीच नहीं रहे।

पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्य मुकुल रॉय का सोमवार तड़के करीब 1:30 बजे कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन के साथ बंगाल की राजनीति का एक अहम अध्याय समाप्त हो गया।

लंबी बीमारी के बाद ली अंतिम सांस

परिवार के अनुसार, मुकुल रॉय लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। 2023 में डिमेंशिया और पार्किंसन जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का पता चला था। मार्च 2023 में हाइड्रोसेफेलस के चलते ब्रेन सर्जरी हुई।

जुलाई 2024 में घर पर गिरने से सिर में गंभीर चोट लगी और खून का थक्का निकालने के लिए एक और सर्जरी हुई। डायबिटीज, सांस की तकलीफ और हाई ब्लड शुगर ने उनकी हालत को और कमजोर कर दिया था। पिछले कुछ समय से वे सक्रिय राजनीति से लगभग दूर थे।

TMC की स्थापना में अहम भूमिका

14 मई 1954 को उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा में जन्मे मुकुल रॉय ने राजनीति की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की। कलकत्ता विश्वविद्यालय से साइंस में स्नातक और मदुरै के कामराज विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए किया।

1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई तो रॉय शुरुआती नेताओं में शामिल रहे। मृदुभाषी और कुशल आयोजक के रूप में पहचाने जाने वाले रॉय बयानबाजी से दूर रहते थे। बूथ समितियां, जिला स्तर के समीकरण, टिकट वितरण और गठबंधन प्रबंधन में उन्हें महारत हासिल थी।

2006 में राज्यसभा सदस्य बने और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में TMC के नेता रहे। 2011 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव में तृणमूल की जीत और 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार के अंत में उनकी रणनीतिक भूमिका अहम मानी जाती है।

रेल मंत्री का कार्यकाल और विवाद

यूपीए-2 सरकार में पहले शिपिंग राज्य मंत्री रहे। मार्च 2012 में विवादों के बीच 32वें रेल मंत्री बने। 20 मार्च से 21 सितंबर 2012 तक कार्यकाल रहा। बाद में नारदा स्टिंग और सारदा चिट फंड मामले ने उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया।

TMC से निष्कासन, BJP में एंट्री और वापसी

2017 में TMC से निकाले जाने के बाद नवंबर 2017 में BJP में शामिल हुए। BJP में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने और बंगाल में संगठन मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। 2019 लोकसभा चुनाव में BJP की 18 सीटों की जीत में उनकी रणनीति अहम मानी गई।

2021 विधानसभा चुनाव में BJP से विधायक चुने गए। अगस्त 2021 में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में TMC में वापसी की। लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण सक्रिय राजनीति से दूर रहे।

दलबदल मामला और सुप्रीम कोर्ट

TMC में वापसी के बाद दलबदल कानून के तहत मामला चला। कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित किया था। लेकिन 16 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।

कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच और विधानसभा अध्यक्ष, सचिव और विपक्ष के नेता से जवाब मांगा था।

राजनीतिक जगत से शोक संदेश

  • BJP नेता दिलीप घोष ने कहा: “मुकुल रॉय अनुभवी राजनीतिज्ञ थे। उनका योगदान हमेशा याद रहेगा।”
  • TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा: “मुकुल दा पार्टी के शुरुआती दिनों के स्तंभ थे। उनके निधन से दुख है।”

उनके निधन से बंगाल की राजनीति में शोक की लहर है।

मुकुल रॉय के जीवन की मुख्य बातें:

  • TMC संस्थापक सदस्य, पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री
  • 2011 चुनाव में TMC की जीत में रणनीतिक भूमिका
  • 2017 में TMC से निकाले गए, BJP में शामिल
  • 2021 में TMC में वापसी, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से दूर
  • दलबदल कानून का मामला, सुप्रीम कोर्ट से राहत

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