कोलकाता | 15 अक्टूबर 2025 : मोहन बागान सुपर जाइंट (Mohun Bagan SG) सिर्फ एक फुटबॉल क्लब नहीं, बल्कि भारतीय आत्मसम्मान, खेल संस्कृति और आज़ादी की भावना का प्रतीक है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1889 को हुई थी और यह एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल क्लबों में शामिल है।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 19वीं सदी की शुरुआत में खुद को भारत में एक नए शासक के रूप में स्थापित कर लिया था। कई अंग्रेज प्रशासक भारत आकर यहां अपनी किस्मत आजमाने लगे। यही वो दौर था, जब इंग्लैंड में एसोसिएशन फुटबॉल का खेल लोकप्रिय हो रहा था।
🏆 1911: जब फुटबॉल बना स्वतंत्रता का प्रतीक
- 29 जुलाई 1911 को मोहन बागान ने ईस्ट यॉर्कशायर रेजिमेंट को हराकर IFA शील्ड जीती
- यह जीत औपनिवेशिक भारत में राष्ट्रीय चेतना और आत्मगौरव का प्रतीक बनी
- टीम के अधिकांश खिलाड़ी नंगे पाँव खेले, फिर भी अंग्रेज़ों को हराया
- इस दिन को हर साल ‘मोहन बागान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है
अंग्रेजों को चमड़े की गेंद पर किक मारते देखकर भारतीयों के बीच इस खेल को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। इस खेल ने भारतीय जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया था।
26 अक्टूबर 1863 को लंदन में ‘फुटबॉल एसोसिएशन’ की स्थापना हुई, जो इंग्लैंड के फुटबॉल को नियंत्रित करने वाला शासी निकाय है। इसकी स्थापना के बाद ही इस खेल में नियम भी बनाए गए।
🏟️ क्लब की शुरुआत और विरासत
- स्थापना: 15 अगस्त 1889, कोलकाता
- संस्थापक: ज्योतिंद्र नाथ बसु, भूपेंद्रनाथ बसु, महाराजा दुर्गा चरण लाहा, महाराजा राजेंद्र भूप बहादुर
- पहला मैदान: मोहन बागान विला, मार्बल पैलेस
- पहला टूर्नामेंट: कूच बिहार कप (1893)
- नाम परिवर्तन: मोहन बागान एथलेटिक क्लब (1890 के दशक में)
कुछ दस्तावेज बताते हैं कि भारत में पहला फुटबॉल क्लब 1872 में कलकत्ता एफसी के रूप में स्थापित हुआ था, लेकिन कुछ दस्तावेज बताते हैं कि यह क्लब पहले एक रग्बी क्लब के रूप में पहचाना गया, जो साल 1894 में एक फुटबॉल क्लब के रूप में बदला।
भारतीय फुटबॉल का श्रेय नागेंद्र प्रसाद सर्वाधिकारी को जाता है, जिन्होंने कोलकाता के साथ बंगाल में कई फुटबॉल क्लब स्थापित किए। उनके इसी कदम ने भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता को बढ़ाया।
🏅 प्रमुख उपलब्धियाँ
| प्रतियोगिता | खिताबों की संख्या |
|---|---|
| डूरंड कप | 17 |
| कलकत्ता फुटबॉल लीग | 30 |
| IFA शील्ड | 22 |
| फेडरेशन कप | 14 |
| रोवर्स कप | 14 |
| ISL लीग शील्ड | 2 |
| इंडियन सुपर लीग खिताब | 2 |
15 अगस्त 1889 में मोहन बागान क्लब की स्थापना हुई। इस क्लब की शुरुआत ज्योतिंद्र नाथ बसु, भूपेंद्रनाथ बसु, महाराजा दुर्गा चरण लाहा और महाराजा राजेंद्र भूप बहादुर जैसे मशहूर लोगों ने मिलकर की थी। इस क्लब के लिए पहली मीटिंग कोलकाता में स्थित भूपेंद्रनाथ बसु के घर में हुई।
मार्बल पैलेस के अंदर स्थित ‘मोहन बागान विला’ में इसका पहला मैदान था, जिसके चलते क्लब को अपना नाम भी मिला। करीब एक साल बाद थोड़ा बदलाव करते हुए इसे ‘मोहन बागान एथलेटिक क्लब’ नाम दिया गया।
⚽ भारतीय फुटबॉल में योगदान
- नागेंद्र प्रसाद सर्वाधिकारी को भारतीय फुटबॉल का जनक माना जाता है
- मोहन बागान ने देशभर में फुटबॉल कल्चर को मजबूत किया
- क्लब ने बाईचुंग भूटिया, सुनिल छेत्री, सुब्रत पाल जैसे खिलाड़ियों को मंच दिया
- फैनबेस: भारत का सबसे भावनात्मक और समर्पित समर्थक वर्ग
मोहन बागान क्लब ने भारत में फुटबॉल के विकास और लोकप्रियता में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। 29 जुलाई 1911 का दिन बेहद खास था, जब मोहन बागान की टीम ने ईस्ट ‘यॉर्कशायर रेजिमेंट’ को शिकस्त देते हुए ‘आईएफ शील्ड’ जीतकर इतिहास रच दिया। यह इस खिताब को जीतने वाला पहला भारतीय क्लब था। यह जीत आजादी के आंदोलन का प्रतीक बनी। इसी दिन को प्रतिवर्ष ‘मोहन बागान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
मोहन बागान क्लब ने भारतीय खिलाड़ियों को पेशेवर फुटबॉल का मंच दिया। इस क्लब ने देशभर में फुटबॉल कल्चर को मजबूत किया है। मोहन बागान के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने भारतीय टीम के साथ ‘आई-लीग’ और ‘इंडियन सुपर लीग’ (आईएसएल) में अहम योगदान दिया।
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