कोलकाता, 21 दिसंबर 2025 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद मॉडल पर मस्जिद निर्माण को लेकर पहली बार खुलकर बयान दिया है।
कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा कि यह निर्माण न तो हिंदुओं के फायदे में है और न ही मुसलमानों के।
उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश और वोट बैंक की राजनीति करार दिया, जो पुराने विवाद को फिर से भड़काने की कोशिश है।

भागवत ने क्या कहा?
- भागवत ने स्पष्ट किया कि अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खत्म हो चुका है।
- मुर्शिदाबाद में फिर से “बाबरी मस्जिद” बनाकर विवाद को दोबारा शुरू करना पॉलिटिकल षडयंत्र है, जो सिर्फ वोटों के लिए किया जा रहा है।
- उन्होंने कहा, “यह हिंदू और मुसलमान दोनों के लिए खतरनाक है। सरकार को न मंदिर बनाना चाहिए, न मस्जिद।”
- भागवत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों का जिक्र करते हुए हिंदू एकता पर जोर दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर 2025 (बाबरी विध्वंस की बरसी) को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा/रेजिनगर में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद की नींव रखी थी।
- कबीर ने दावा किया कि यह मस्जिद अयोध्या की बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति होगी, और इसमें लाखों की भीड़ जुटाई गई।
- इस कदम से राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा, बीजेपी ने इसे वोट बैंक पॉलिटिक्स बताया, जबकि TMC ने कबीर से दूरी बनाई।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- BJP : इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश बताया और टीएमसी पर आरोप लगाया।
- TMC: कबीर को पहले ही सस्पेंड कर चुकी है, इसे व्यक्तिगत कदम बताया।
- अन्य पार्टियां भी इस मुद्दे पर विभाजित, 2026 विधानसभा चुनाव से पहले माहौल गरम।
भागवत का यह बयान बंगाल दौरे के दौरान आया है, जहां वे संघ के कामकाज और समाज में एकता पर फोकस कर रहे हैं।
क्या यह निर्माण वाकई राजनीतिक है या धार्मिक भावना? आप क्या सोचते हैं – कमेंट में बताएं!
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