विनय सिंह बैस, नई दिल्ली । बेटी के लिए ‘परफेक्ट मैन’, बेटे के लिए ‘सुपरमैन’, पत्नी के लिए ‘ही मैन’ और मां के ‘जेंटलमैन’ पुरुष है।

* बच्चों, पत्नी, मां-बाप, परिवार के लिए सामान खरीदने के बाद बचे हुए पैसों से अपना सामान खरीदने वाला पुरुष है।
* अपने दुखों, कष्टों, परेशानियों, आंसुओं को अपने अंदर जज्ब कर लेने वाला पुरुष है।

* बहन, बेटी की विदाई के समय सामान्य रहने की एक्टिंग करने वाला और फिर छुपकर घंटों रोने वाला पुरुष है।
* बिटिया को जमाने भर से लड़ने की हिम्मत देने वाला, बेटे को मजबूत मर्द बनने की सीख देने वाला, पत्नी को सुरक्षा का विश्वास दिलाने वाला और मां -बाप के बुढ़ापे की लाठी पुरुष है।
* अपनी प्रियतमा के हाथों को कोमल, नाजुक बनाए रखने के लिए अपने हाथों को खुरदरा कर लेने वाला, उन पर कालिख लगने से न डरने वाला पुरुष है।

* बॉस की डांट, ऑफिस की तमाम टेंशन घर के दरवाजे के बाहर छोड़कर बच्चों के सामने मुस्कुराते हुए आने वाला पुरुष है।
* अपने मां-बाप, भाई-बहन, बुआ-फूफा, मौसी-मौसा, मामा-मामी, सास-ससुर, साला-साली, समाज और देश की चिंता करने वाला पुरुष है।
* शत्रु के समक्ष काल बन जाने वाला, बच्चों पर वात्सल्य लुटाने वाला, प्रियतमा पर प्रेम बरसाने वाला और मां-बाप के सामने बच्चा बन जाने वाला पुरुष है।

* विवाह के बाद मां-बाप और पत्नी के बीच कठिन संतुलन साधने वाला पुरुष है।
* पलकें भीगी होने पर भी मुस्कुराने का जादू करने वाला पुरुष है।
* नारी अगर श्रद्धा है तो पुरुष परिवार, समाज और देश का विश्वास तथा रक्षा कवच है।

विनय सिंह बैस
Shrestha Sharad Samman Awards

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