खड़गपुर। विश्व साम्यवादी आंदोलन के नेता तथा सोवियत समाजवाद के निर्माता जोसेफ स्टालिन की 74वीं पुण्यतिथि के अवसर पर एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी ने जिले भर में उत्साहपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए। मेचेदा, भोगपुर, पाँशकुड़ा, तमलुक, मयना, निमतौड़ी, नंदीग्राम, हल्दिया, कांथी, एगरा सहित विभिन्न स्थानों पर स्टालिन की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं चर्चा सभाएं हुईं।
सुबह जिला कार्यालय खुदीराम भवन में राज्य समिति सदस्य जीवन दास, विश्वनाथ पड़िया सहित अनेक नेताओं ने स्टालिन की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। परिचर्चा सभा को संबोधित करते हुए नेतृत्व ने कहा कि कुछ तत्व सुनियोजित रूप से विकृत प्रचार के जरिए स्टालिन को कालिमा मलिन करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि स्टालिन की मृत्यु पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, लेखिका रम्या रोल्ला, बर्नार्ड शॉ तथा इंग्लैंड के कैंटरबरी के डीन ह्यूलेट जॉनसन जैसे गैर-कम्युनिस्ट प्रमुख व्यक्तियों ने गहन श्रद्धांजलि दी थी।
नेहरू ने कहा था : “स्टालिन ने इस युग के इतिहास को तोड़ा, नया गढ़ा तथा विभिन्न दिशाओं से प्रवाहित किया, संभवतः किसी और ने ऐसा नहीं किया। वे प्रबल पुरुष बन गए थे। करोड़ों लोगों के प्रति उत्तरदायी, उन्हें असंख्य लोग अपना, मित्र या परिवार का सदस्य मानते थे, न केवल सोवियत संघ में, बल्कि विश्व भर में। सत्ता में रहें या न रहें, वे अपने अधिकार से महान थे। उनका प्रभाव शांति के पक्ष में रहा। युद्ध में वे महान योद्धा सिद्ध हुए।”
गांधीजी के सच्चे उत्तराधिकारी आचार्य विनोबा भावे ने कहा था : “मार्शल स्टालिन ने बहुआयामी गुणों से विश्व जनता का विश्वास अर्जित किया। दुनिया इन गुणों को कभी न भूलेगी। उनके निधन से रूस का नहीं, समस्त विश्व का नुकसान हुआ।”
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