कोलकाता। 23 फरवरी को कासिमबाजार के महाराजा श्रीशचंद्र नंदी की 74वीं पुण्यतिथि के अवसर पर महाराजा श्रीशचंद्र कॉलेज द्वारा एक विशेष ‘स्मारक व्याख्यान’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने महाराजा के योगदान और उत्तर कोलकाता की ऐतिहासिक विरासत पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित मजुमदार के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने महाराजा की स्मृति को संजोए रखने के कॉलेज के संकल्प को दोहराया।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण डॉ. सोमेंद्रचंद्र नंदी रहे। उन्होंने अपने पिता और बंगाल के अंतिम महाराजा श्रीशचंद्र नंदी के गौरवशाली जीवन और उनके कार्यों को याद किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महाराजा का जीवन बंगाल की संस्कृति और समाज सेवा के प्रति समर्पित था।

मुख्य वक्ता और कोलकाता के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष बसु ने ‘महाराजा श्रीशचंद्र कॉलेज : उत्तर कोलकाता : विरासत की परंपरा’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने प्रभावशाली और तथ्यपूर्ण संबोधन में श्यामबाजार क्षेत्र के इतिहास और कॉलेज की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक स्थिति पर प्रकाश डाला।
इतिहासकार प्रोफेसर सौमित्र श्रीमानी ने कासिमबाजार राजघराने के इतिहास और समाज पर उनके प्रभाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कॉलेज के प्रोफेसर बिद्युत सरकार और प्रोफेसर कुंतल मित्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इतिहास विभाग के प्रमुख डॉ. संदीप विश्वास ने इस तरह के आयोजनों की प्रासंगिकता और छात्रों के लिए इसके महत्व को समझाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर अमृता साहा द्वारा किया गया और अंत में प्रोफेसर सोनाली बनर्जी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
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