IMG 20250906

संस्मरण : ऐ दिल चल उन्हीं गलियों में घूमें…

श्याम कुमार राई ‘सलुवावाला’। साथियों, वर्तमान में मेरी उम्र 72 वर्ष तीन महीने है। चूंकि थोड़ा-बहुत शब्दों को जोड़ने का शऊर आता है इसलिए हम जैसो के लिए एक सुविधा ये हो जाती है कि शब्द को जोड़-जाड़ कर गुजरे हुए समय में विचरण कर आते हैं। फिर से हम उन गली-कूचो में घूमने का आनंद ले लेते हैं। यूं पुराने दिनों को यादों के सहारे सभी जी लेते हैं। मगर हम उन पलों को जीते भी हैं साथ ही शब्दों के जरिए उतार भी लेते हैं जिसका आनंद कुछ अपनी तरह का होता है।

मैं आज सन् 1959-60 के दौर में जाऊंगा आर उस दौरान की एक दिलचस्प घटना का जिक्र करूंगा। बात इसी साल की है मैं छह साल का हो गया था। इसलिए ऊन दिनों के हिसाब से स्कूल में भर्ती होने की मेरी उम्र हो गई थी। एक दिन मेरे पिताजी बिलासपुर (उन दिनों मध्य प्रदेश में था, अब छत्तीसगढ में है) के रेलवे स्कूल ले गए। जहां प्रधानाध्यापक के दफ्तर में हम गए वहां प्रधानाध्यापक जी ने मुझे बांया हाथ उठाकर अपने बांये कान को स्पर्श करते हुए सिर के बीचो बीच ले जाते हुए दाहिने कान को छूने की कहा।

मैंने वैसा ही किया तो मेरे हाथ से कान बमुश्किल, पर छू गई और मैं भर्ती कर लिया गया। नो बर्थ सर्टिफिकेट, नो आधार कार्ड, नो रेसिडेंशियल सर्टिफिकेट नो पैरंट्स इंटरव्यू बस एडमिशन का काम संपन्न हो गया। मैं दूसरे दिन से खाकी कपडे का बना थैला लेकर स्कूल जाने लग गया। यहां मैंने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की।

फिर पिताजी का तबादला हाऊबाग (जबलपुर) हो गया। यहां यह बताता चलूं कि किसी बच्चे द्वारा उस तरीके से कान छू सकने का मतलब ये था कि बालक छह वर्ष का हो गया है यह पद्धति उन दिनों का यह सटीक प्रमाण माना जाता था कि बच्चा छह वर्ष का हो गया है क्योंकि बांये हाथ से दाहिने कान को छू सकता है।

यहां स्पष्ट करता चलूं कि उन दिनों छह वर्ष की आयु में ही पहली कक्षा में भर्ती कराए जाने का यही और ऐसा ही नियम था। नो नर्सरी, नो के.जी., नो डोनेशन सीधे पहली कक्षा में प्रवेश मिल जाया करता था और कक्षा में ब्लेक बोर्ड पर चॉक से लिख कर “अ आ इ ई” “क ख ग” की पढ़ाई की जाती थी।

कहने का लब्बोलुआब यही कि हमारे समय में बच्चों की स्कूल भर्ती का हिसाब किताब ऐसा ही सरल और सहज हुआ करता था। अब कोई भी कह सकता है भाई जमाना बदल गया। आप भी कहां की बात ले बैठे। बिल्कुल, आप सबका कहना और आप सबकी सोच सही है। मगर इतना जरूर कहूंगा कि आजकल शिक्षा के नाम पर जो कुछ चल रहा है और जैसा हो रहा है ऐसा भी तो नहीं होना चाहिए न! क्या कहते हैं आप सब, नहीं होना चाहिए न…!!??

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2 × three =