विनय सिंह बैस। इन दिनों पापा की ड्यूटी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की अंग्रेजी विषय की कॉपियां चेक करने में लगा करती थी। 10 दिन की ड्यूटी होती थी। रोज 50 कॉपियां चेक करनी होती थी। उस समय प्रति कॉपी 3 रुपये मिला करता था। यह तनख्वाह के अतिरिक्त आय हुआ करती थी। इन 1500/- रुपये की तब बड़ी वैल्यू हुआ करती थी। क्योंकि इन 1500 से कभी टेबल फैन तो कभी बड़ा वाला स्टील का बक्सा घर मे आ जाता था।

पापा सुबह रायबरेली बस से जाते थे और कॉपी चेक करके शाम को वापस आ जाते। जैसे आजकल हम लोग कोई व्हाट्सएप मैसेज देखकर मन ही मन मुस्कुराते रहते हैं, वैसे ही कभी-कभी पापा घर आने पर मन ही मन खुश होते रहते। पूछने पर बताते कि कॉपी में आज 100 -100 के दो नोट मिले थे। पापा खुश होते तो हम उन्हें थोड़ा और कुरेदते कि बताओ न पापा कॉपियों में और क्या क्या मिलता है??
तब पापा मुस्कराते हुए बताते कि कुछ बच्चे पास होने के लिए अजीबोग़रीब तिकड़म भिड़ाते हैं-
“कोई लिखता कि पिताजी की तबियत खराब थी, इसलिए पढ़ नहीं पाया। गुरु भी पिता जैसा ही होता है, इसलिए आप मेरे पिता हुए, पास जरूर कर देना।”

थोड़े बत्तमीज टाइप के और अपना रिजल्ट खुद ही घोषित कर चुके लड़के लिखते-
“गाय हमारी माता है, हमको कुछ नहीं आता है।”
ज्यादा बत्तमीज और daredevil टाइप के लड़के कुछ इस तरह लिखते-
“अगर मुझे पास किया तो आप मेरे जीजा, नहीं तो मैं आपका जीजा।”

कुछ बनिया बुद्धि लड़के लिखते कि- “गुरुजी 100 रुपये उत्तर पुस्तिका के साथ नत्थी कर दिए हैं, आप अपने बच्चों को मिठाई खिला देना और हमें भी मिठाई खिलाने का अवसर देना।”

कोई हिंदी प्रेमी लिखता कि –
“गुरु जी अंग्रेजी तो विदेशी भाषा है, हम ठहरे स्वदेशी समर्थक। बाकी आप खुद समझदार हैं।”

स्टार प्लस देखने वाली कोई लड़की इमोशनल ब्लैकमेल करते हुए लिखती कि –
“गुरुजी मेरी शादी तय होने वाली है। लड़के वालों को कम से कम दसवीं पास लड़की चाहिए। मम्मी की तबीयत खराब होने के कारण मैं पूरे साल पढ़ाई नहीं कर पाई। गुरुजी आपकी भी कोई सगी या चचेरी बेटी तो अवश्य ही होगी, इसलिए आप समझते होंगे कि लड़की की शादी टूट जाये तो लोग क्या क्या नहीं कहते?? इसलिए मुझे अपनी ही बेटी समझ कर पास कर देना, मैं आपकी आजीवन ऋणी रहूंगी।”
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(आपकी ही एक बेटी)

फिर हम थोड़ा और कुरेदते- “पापा ये जो लड़कियां दर्द भरी दास्तां लिखती हैं, इनको आप पास कर देते हो?”
पापा सधा सा जवाब देते – अंग्रेजी के 50 नंबर के प्रश्नपत्र में अगर 14 नंबर तक मेरी ये तथाकथित बेटियां पहुंच जाती हैं तो हम इधर -उधर करके ढाई नंबर तक बढ़ा के 16.5(=17) कर देते हैं और वे पास हो जाती हैं। नहीं तो, इन बेटियों को शादी के लिए एक साल और इंतजार करने के लिए लिख देते हैं।”

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विनय सिंह बैस

(विनय सिंह बैस)
शिक्षक पुत्र

Shrestha Sharad Samman Awards

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