तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत मेदिनीपुर के विधाननगर में स्थित उनके निवास पर ‘तपनज्योति स्मृति ग्रंथालय’ का उद्घाटन किया गया। यह ग्रंथालय पुस्तक प्रेमियों और ज्ञान पिपासु लोगों के लिए समर्पित है।
आयोजकों ने बताया कि ग्रंथालय में इंग्लिश साहित्य की कालजयी और ध्रुपद कविता, नाटक, उपन्यास, और लघु कथाओं का संग्रह है। इसके अलावा इसमें बांग्ला भाषा और साहित्य के कुछ महत्वपूर्ण और दुर्लभ पुस्तकें भी हैं। ग्रंथालय में विदेशी शोध पत्र और जर्नल भी उपलब्ध हैं।
उद्घाटन समारोह में मेदिनीपुर के कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें विद्वान, शिक्षाविद् और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। इस अवसर पर, प्रोफेसर बंदोपाध्याय की साहित्यिक और प्रशासनिक योगदान को याद किया गया।
ग्रंथालय का संचालन परिवार के सदस्यों द्वारा किया जाएगा। ग्रंथालय सप्ताह में दो दिन, शनिवार और रविवार को खुला रहेगा।
इस कार्यक्रम में विद्या सागर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शंकर प्रसाद सिंह, वर्तमान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जयजीत घोष, प्रोफेसर देवदास रॉय, प्रोफेसर अमलकान्ति चक्रवर्ती, विशिष्ट प्रशासनिक अधिकारी, निबंधकार और उपन्यासकार मृदुल श्रीमानी, पूर्व अधिकारी रबिन भट्टाचार्य, समाजसेवक तापस सिन्हा,
फिल्म समीक्षक सिद्धार्थ सांतरा, उद्यमी आनंद गोपाल माईती, प्रधान शिक्षक प्रसून कुमार पड़िया, कवि विद्युत पाल, चित्रकार अचिंत्य मारिक, समाजसेवी शिक्षक सुदीप कुमार खाड़ा, संगीतकार मातुआ मल्लिक, नाट्यकर्मी मुस्ताक अली, चिकित्सक डॉ. जयदीप पाल, पूर्व प्रोफेसर सुरेश चंद्र दास आदि उपस्थित थे।
कार्यक्रम में स्वर्गीय बंदोपाध्याय के अथक साहित्यिक प्रयासों और कुशल प्रशासक के रूप में उनके योगदान को याद किया गया। स्वर्गीय बंदोपाध्याय के दामाद, चंद्रकोणा विद्या सागर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोरंजन गोस्वामी ने पुस्तकालय प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण बिंदु प्रस्तुत किए।
प्रोफेसर बंदोपाध्याय की बेटी और विद्या सागर विद्या पीठ बालिका विद्यालय की प्रधान शिक्षिका स्वाति बंदोपाध्याय ने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तकालय मेदिनीपुर और आसपास के क्षेत्रों के पुस्तक प्रेमियों का स्वागत करेगा। फिलहाल, पुस्तकालय सप्ताह में दो दिन खुला रहेगा।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि प्रोफेसर तपनज्योति बंदोपाध्याय एक प्रसिद्ध शिक्षाविद् और प्रशासक थे। उन्होंने मेदिनीपुर कॉलेज और विद्या सागर विश्वविद्यालय में अध्यापन किया और विद्या सागर विश्वविद्यालय के कला विभाग के डीन और खड़गपुर कॉलेज के प्राचार्य के रूप में भी कार्य किया।
ग्रंथालय का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और शैक्षिक अवसर है, जो प्रोफेसर तपनज्योति बंदोपाध्याय की विरासत को जीवित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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