खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत केशियाड़ी ब्लॉक अंतर्गत नछिपुर ग्राम पंचायत के कोपराड़ गाँव निवासी अमल कर पेशे से एक प्रवासी मजदूर हैं। रैमिंग मास (पत्थर चूर्ण फैक्ट्री) में कार्य करने के दौरान वे गंभीर बीमारी सिलिकोसिस से ग्रसित हो गए। जिला सिलिकोसिस बोर्ड के माध्यम से उन्हें सरकारी सिलिकोसिस कार्ड प्राप्त हो चुका है।
राज्य सरकार की सिलिकोसिस नीति के अनुसार कार्ड मिलने के बाद आवेदन करने पर पीड़ित को दो लाख रुपये की एकमुश्त क्षतिपूर्ति तथा प्रति माह चार हजार रुपये पेंशन देने का प्रावधान है।
लेकिन आवेदन किए लगभग चार माह बीत जाने के बावजूद क्षतिपूर्ति की राशि अब तक नहीं मिल सकी है। सरकारी लालफीताशाही के कारण यह परिवार गंभीर संकट में फंसा हुआ है।

बीमारी के इलाज में अपनी सारी जमा-पूंजी खर्च कर चुके अमल कर की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी में लंबे समय तक जीवित रहना कठिन होता है। एक ओर गंभीर बीमारी, दूसरी ओर आर्थिक तंगी, इस दोहरे संकट से जूझ रहा यह परिवार अब बेहद असहाय स्थिति में है।
अमल कर के पुत्र अमित कर, जो नछिपुर आदिवासी हाई स्कूल में दसवीं कक्षा का छात्र है, पढ़ाई जारी रखना चाहता है। लेकिन पढ़ाई के खर्च और पिता की दवाइयों के बीच परिवार निरंतर मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
परिवार की इस दयनीय स्थिति की जानकारी समाजसेवी झरना आचार्य से मिलने के बाद स्वयंसेवी संगठन मेदिनीपुर छात्र समाज सहायता के लिए आगे आया। संगठन की पहल पर अमित के लिए पूरी किताबों की व्यवस्था की गई।
रवींद्र निलय मुक्तमंच में जिले के जरूरतमंद मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित पुस्तक वितरण कार्यक्रम में बस भाड़ा न होने के कारण अमित उपस्थित नहीं हो सका था। इसके बाद सोमवार को दूधेबुधे हाईस्कूल के पार्श्व शिक्षक सोमनाथ आचार्य स्वयं स्कूल के सामने पहुँचकर अमित को किताबें सौंप गए।
मेदिनीपुर छात्र समाज की इस पहल से न सिर्फ एक छात्र की पढ़ाई को सहारा मिला है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी सशक्त उदाहरण सामने आया है।
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