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मेदिनीपुर : विश्व कविता दिवस पर शब्द, संवेदना और सेवा का संगम – रक्त की बूंदों में कविता, मंच पर संस्कृति का उत्सव

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। कविता जब जीवन से जुड़ती है, तो वह सिर्फ शब्दों में नहीं, कर्म में भी उतरती है। स्वर आवृत्ति मेदिनीपुर के दो दिवसीय आयोजन में विश्व कविता दिवस के अवसर पर स्मृतियों, संवेदनाओं और सामाजिक दायित्व का ऐसा ही जीवंत संगम देखने को मिला।

आवृति कलाकार अनुभव पाल की स्मृति को समर्पित इस आयोजन की शुरुआत रक्तदान शिविर से हुई। पहले ही दिन 41 रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया, जिनमें 16 महिलाएँ भी शामिल रहीं।

मेदिनीपुर जिला वॉलेंटरी ब्लड डोनर्स फोरम के सहयोग से आयोजित इस शिविर में सेवा का उत्साह साफ झलक रहा था। इस दौरान सुजय हाजरा, मदन मोहन माईती, चंदन बसु, डॉ. सुहास रंजन मंडल, विद्युत पाल, सौमेन घोष, डॉ. त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

विद्यासागर स्मृति मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक सेवा के साथ रचनात्मकता की भी समानांतर धारा बहती रही। आबृत्ति, अंकन, हस्तलेखन और क्विज जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में शताधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

निर्णायक मंडल में मणिकांचन राय, नरसिंह दास, दीपक बसु, रत्ना दे, स्वागता पांडेय, अनिंदिता शासमल, इंद्राणी दाशगुप्त, राहुल नंदी एवं रुद्रप्रसाद बेरा शामिल रहे।

कार्यक्रम के समानांतर इंडिया फार्मेसी के सहयोग से निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी आयोजित किया गया, जिसने आयोजन की सामाजिक प्रतिबद्धता को और सशक्त किया। विश्व कविता दिवस के मुख्य सांस्कृतिक अनुष्ठान में संस्था ने प्रतिष्ठित कवि प्रोफेसर डॉ. सोमनाथ दे को सम्मानित किया।IMG 20260327 WA0020

इस अवसर पर जगबन्धु अधिकारी, जयंत साहा, अमीय पाल, आलोक बरन माईती, सुतनुका मित्र माईती, चित्ररंजन दास, सुदीप कुमार खांड़ा, अजय साउ, ईशिता चट्टोपाध्याय एवं पायल सामंत सहित अनेक सांस्कृतिक हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

स्वर आवृत्ति के नन्हे कलाकारों ने एकल एवं समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया। शिवानी पाल, सुपर्णा कोले, शीला महापात्र, मधुश्री घोष, रत्ना मान्ना, साथी बंदोपाध्याय, कनिका धर, देवश्री पंडा और मिठू कर्मकार की प्रस्तुतियाँ श्रुति-मधुर रहीं।

इस अवसर पर राहुल नंदी के निर्देशन में “सृष्टि आठ एकेडमी” की आर्ट गैलरी का उद्घाटन भी किया गया, जहाँ ‘कविता की दीवार’ पर विशिष्ट कवियों की रचनाएँ आकर्षण का केंद्र बनीं।

संस्था के कर्णधार शुभदीप बसु ने कहा, “हम मानव समाज के प्रति दायबद्ध हैं। पिछले छह वर्षों से रक्तदान शिविर का आयोजन कर रहे हैं। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिताएँ भी साथ में रखते हैं। हर रक्तदाता को सलाम, हर संस्कृति प्रेमी को नमन।”

अंत में दीपा बोस एवं मनीषा बोस ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। यह आयोजन यह संदेश दे गया कि जब कविता समाज से जुड़ती है, तो वह केवल सुनाई नहीं देती बल्कि जी जाती है।IMG 20260327 WA0016

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