कोलकाता हिन्दी न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट : असम के ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा मयांग (Mayong), एक ऐसा स्थान जहाँ हवा में जादू की सनसनी घुली रहती है, और जंगलों की छाँव में छिपे रहस्य आज भी लोगों को लुभाते और डराते हैं। ‘
भारत की ब्लैक मैजिक कैपिटल’ के नाम से जाना जाने वाला यह छोटा-सा गाँव मोरिगांव जिले में स्थित है, जो गुवाहाटी से मात्र 45 किलोमीटर दूर है।
यहाँ की मिट्टी में तंत्र-मंत्र की जड़ें इतनी गहरी हैं कि सदियों पुरानी कथाएँ आज भी जीवित हैं—लोगों का हवा में गायब हो जाना, इंसानों का जानवर बन जाना, जंगली बाघों को आज्ञा मानना, और बीमारियों का चमत्कारी इलाज लेकिन क्या ये सिर्फ लोककथाएँ हैं, या वास्तविक अलौकिक शक्तियों का प्रमाण?

इस विस्तृत रिपोर्ट में हम खोलेंगे मयांग के रहस्यों की हर परत—पौराणिक उत्पत्ति से ऐतिहासिक घटनाओं, स्थानीय लोगों की अनकही कहानियों, पैरानॉर्मल एक्टिविस्टों के अनुभवों और संदर्भों के साथ। यह यात्रा न केवल इतिहास की गहराई में ले जाएगी, बल्कि हमें सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या जादू वाकई सीमाओं से परे है?
‘माया’ से ‘मयांग’ तक
मयांग का नाम संस्कृत शब्द ‘माया’ (भ्रम या जादू) से लिया गया माना जाता है, जो इस भूमि की अलौकिक प्रकृति को दर्शाता है। कुछ विद्वान इसे डिमासा भाषा के ‘मियॉन्ग’ (हाथी) से जोड़ते हैं, जो जंगलों के राजा को संदर्भित करता है लेकिन असली रहस्य इसकी पौराणिक जड़ों में छिपा है।
महाभारत में मयांग का उल्लेख ‘प्राग्ज्योतिषपुर’ (प्राचीन असम) के साथ मिलता है। कथा के अनुसार, भीम के पुत्र घटोत्कच ने कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले मयांग के जंगलों में जाकर तांत्रिक शक्तियाँ अर्जित कीं।
घटोत्कच की माँ हिडिम्बा कछारी राजवंश से थीं, जो मयांग के आसपास का क्षेत्र था। पुरातात्विक खुदाइयों से तांत्रिक पूजा स्थलों, मानव बलि के अवशेष और प्राचीन यंत्रों के प्रमाण मिले हैं, जो 8वीं-9वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक ले जाते हैं।
ये कथाएँ बताती हैं कि मयांग कभी तंत्र-शक्ति पूजा का केंद्र था, जहाँ द्रविड़ जनजातीय रीति-रिवाजों और तिब्बती तंत्र का मिश्रण हुआ। असमिया लोकसाहित्य ‘पाद्दण’ में इनकी वंशावली गाई जाती है।
1624 ईस्वी में ‘बोंगसावाली गॉइड’ नामक पांडुलिपि के अनुसार, मैबोंग के सुन्यत सिंघा ने मयांग राज्य की स्थापना की। आज भी यहाँ एक पारंपरिक राजा है, जो सामाजिक रूप से सम्मानित है, लेकिन राजनीतिक शक्ति से वंचित।
कुछेक मान्यताओं के अनुसार, पारंपरिक रूप से यहाँ के लोग “बेज/ओझा” — यानी वैद/तांत्रिक चिकित्सक — की परम्परा से जुड़े रहे हैं।
यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आई — और समय के साथ गांव की छवि “मायावी” बनकर बाहर फैल गई। ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन ने हाल के वर्षों में इस विरासत को संरक्षित करने और पर्यटन-केंद्र में बदलने की कोशिशें भी की हैं।
इतिहास और लोककथाएँ:
मयांग की लोककथाओं में कई चौंकाने वाले किस्से मिलते हैं: लोगों को गायब कर देना, किसी को जानवर में बदल देना, युद्ध में अदृश्य फौज भेजना — ऐसे अनेक किस्से गाँव की मौखिक परंपरा का हिस्सा हैं। इन कथाओं की जड़ें सदियों पुरानी बताई जाती हैं और कुछ स्थानीय-ग्रंथ (mantra puthis) भी इसी विरासत को दर्ज करते हैं।
पर अधिकांश मौखिक दावों का ऐतिहासिक/वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है; यही कारण है कि कई विद्वान और स्थानीय लोग इन कथाओं को “संस्कृति-विरासत” और “लोक-जादू” के रूप में देखने की वकालत करते हैं। The Indian Express+1
मयांग के एक स्थानीय शिक्षक/संग्रहकर्ता उत्पल नाथ (Utpal Nath)— कहते हैं कि मयांग को “लिविंग म्यूज़ियम” बनाने का प्रयास चल रहा है और मठ-परंपराओं, पुथियों को संरक्षित करना आवश्यक है। The Indian Express
ऐतिहासिक यात्रा:
मयांग की कहानी केवल मिथकों तक सीमित नहीं; यह इतिहास के पन्नों में भी बसी है। 1337 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत के सम्राट मुहम्मद शाह ने अहोम साम्राज्य पर आक्रमण के लिए 1,00,000 घुड़सवार भेजे। लेकिन मयांग के जंगलों में घुसते ही पूरी सेना गायब हो गई—कोई चीखें, कोई शव नहीं।
स्थानीय कथाओं में इसे ‘इंद्रजाल’ (जादुई भ्रम) का कमाल बताया जाता है। इसी तरह, 17वीं सदी में मुगल बादशाह औरंगजेब के सेनापति राजा राम सिंह ने असम पर हमला करने से हिचकिचाया।
‘आलमगीर नामा’ में दर्ज है कि राम सिंह अहोम सेना से कम, मयांग के जादू से ज्यादा डरा। उन्होंने तांत्रिकों को सलाहकार बनाया, लेकिन अंततः असफल रहे। अहोम साम्राज्य (1228-1826) के दौरान मयांग कृषि और शिल्प के साथ-साथ जादू-टोने का केंद्र बना।
तांत्रिक ‘बेज’ (ओझा) परिवारों में संस्कृत-असमिया ग्रंथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते रहे। 19वीं सदी में ब्रिटिश राज ने जादू-टोना दबाने की कोशिश की, लेकिन गाँववालों ने परंपराएँ छिपाकर संरक्षित कीं। मानव बलि जैसी क्रूर प्रथाएँ अब बंद हैं, लेकिन हर्बल चिकित्सा और मंत्र आज भी प्रचलित हैं।
आस्था, डर और आज की हकीकत
मयांग के निवासी आज भी इन परंपराओं को जीते हैं। स्थानीय तांत्रिक, रमेश चंद्र बेज (55 वर्ष) कहते है, : “हमारा जादू बुराई के लिए नहीं, रक्षा और चिकित्सा के लिए है। महाभारत काल से चला आ रहा। आज हर्बल दवाओं से कैंसर जैसी बीमारियाँ ठीक करते हैं, लेकिन पुराने मंत्र गुप्त रखते हैं। जंगल में कभी-कभी छायाएँ दिखती हैं—वो पुराने बेजों की आत्माएँ हैं।”
पर्यटक गाइड अंजलि देवी (42 वर्ष) बताती है, “लोग डरते हैं, लेकिन यहाँ शांति है। 2021 में मैंने एक पर्यटक को मंत्र से सिरदर्द ठीक होते देखा। म्यूजियम के हथियार देखकर रोंगटे खड़े हो जाते। लेकिन मानव बलि? वो पुरानी बातें हैं, अब नहीं।”
बेज और हीलर खोंगेश्वर कलिता (60 वर्ष) के अनुसार, “ब्रिटिश आए, गए; सरकार ने दबाने की कोशिश की, लेकिन हमारी परंपराएँ जारी रहेंगी। एक बार एक परिवार आया, बच्चा बीमार था। मंत्र और जड़ी-बूटियों से ठीक हो गया। जादू विज्ञान से अलग नहीं—ये प्रकृति की शक्ति है।” –
एक स्थानीय किसान राम चरण कहते है, “रात में जंगल से आवाजें आती हैं। मेरे दादा ने बताया, मुगल सैनिक आज भी भटकते हैं। लेकिन हम डरते नहीं—बेज हमें बचाते हैं।”
पैरानॉर्मल एक्टिविस्टों के अनुभव
पैरानॉर्मल दुनिया में मयांग हॉटस्पॉट है। डॉ. पीटर जे. क्लॉस, अमेरिकी मानवशास्त्री (50 वर्ष से शोध): “मैंने 1974 में पहला कोला (तांत्रिक अनुष्ठान) देखा। ट्रांस स्टेट नकली नहीं लगता। ड्रम की 130-140 बीट्स, ताड़ी और सामूहिक ऊर्जा से डिसोसिएटिव अवस्था बनती है। लेकिन स्थानीय इसे दैवीय मानते। एक बार मैंने ‘गायब’ होने का प्रयास देखा—वास्तव में ऑप्टिकल इल्यूजन, लेकिन प्रभावी।” (संदर्भ: “Ritual Trance in South Kanara”, 1975 अपडेट)
प्रवीण साकिया बेज, तांत्रिक (मयांग निवासी): “मेरे पास असम से बाहर से मरीज आते हैं। एक बार दुबई से एक परिवार आया—बच्चे पर ‘भूत’ सवार था। मंत्र से ठीक। पैरानॉर्मल? हाँ, लेकिन ये आत्माएँ हैं, जिन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।”
एक पैरानॉर्मल ग्रुप के सदस्य अनाम एक्टिविस्ट (X पोस्ट से प्रेरित): “2024 में हमने नाइट इंवेस्टिगेशन की। रिकॉर्डर पर अजीब आवाजें कैद हुईं—जैसे पुरानी भाषा। एक सदस्य को छाया दिखी, जो गायब हो गई। विज्ञान कहे भ्रम, लेकिन ऊर्जा महसूस हुई।” (समान अनुभव X पर साझा)
डॉ. चिन्नप्पा गौड़ा, लोकसाहित्य विशेषज्ञ (मंगलुरु विश्वविद्यालय): “मयांग असमिया फोकलोर का केंद्र है। कथाएँ अतिरंजित हैं, लेकिन सांस्कृतिक महत्व वास्तविक। आधुनिकता ने जादू को पर्यटन में बदल दिया, लेकिन रहस्य जिंदा है।”
मयांग सेंट्रल म्यूज़ियम: विरासत का संग्रहालय
गाँव का Mayong Central Museum and Emporium (Village Museum & Research Centre) पुराने मंत्र-पुथियों, औजारों और धार्मिक/अनुष्ठानिक वस्तुओं का संग्रह दर्शाता है — जिनमें कुछ 13वीं-19वीं सदी के पुथि-हस्तलिखित भी शामिल बताए जाते हैं।
INTACH और स्थानीय प्रशासन की मदद से इन दस्तावेज़ों-वास्तुओं का संरक्षण और कैटलॉगिंग हो रही है; यही प्रयास मयांग की छवि को ‘सिर्फ भैतिक भय’ से हटाकर सांस्कृतिक-विरासत के रूप में स्थापित कर रहा है। www.ndtv.com+1
आज मयांग पर्यटन का केंद्र है। मयांग सेंट्रल म्यूजियम में तांत्रिक अवशेष, हथियार, हड्डियों के आभूषण और ताड़पत्र ग्रंथ रखे हैं। 2024 में असम सरकार ने ‘मयांग इंद्रजाल मैजिक फेस्टिवल’ शुरू किया।
निष्कर्ष: माया का जाल – भ्रम या सत्य?
मयांग का सच कोई सादा “ब्लैक-मैजिक” दुष्कथानक नहीं है और न ही केवल एक भयावह लोककथा। यह गाँव—जहाँ प्राचीन पुथियाँ, पारंपरिक औषधि-विधियाँ और स्थानीय बेज-परिवार मौजूद हैं—एक जटिल सांस्कृतिक परिदृश्य है। आधुनिक रोशनी में यहाँ का भविष्य—संरक्षण, पर्यटन और शोध—पर निर्भर करेगा।
यदि मयांग को ‘सुरक्षित, वैज्ञानिक और समुदाय-नियमित’ तरीके से विकसित किया जाए तो यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देगा, बल्कि भारत-के-लोक-विश्वास और परंपरागत ज्ञान के अध्ययन के लिए भी समृद्ध संसाधन बन सकता है। The Indian Express+1
- मयांग और ‘डार्क-टूरिज़्म’
एक हालिया शैक्षणिक रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि मयांग को “डार्क-टूरिज्म” के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा सकता है — पर यह तब ही टिकेगा जब: (a) समुदाय की सहमति हो, (b) अंधविश्वास और जोखिम-प्रथाओं पर नियंत्रक नीतियाँ हों, और (c) ऐतिहासिक दस्तावेजों का वैज्ञानिक संरक्षण सुनिश्चित हो। इस दिशा में प्रशासन के छोटे-छोटे कार्यक्रम चल रहे हैं — उदाहरण के लिए स्थानीय “magic festival” और INTACH का संग्रहालय-सहयोग। International Journal of Social Impact+1
सावधानियाँ और नैतिक सवाल
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हानी/दोषारोपण: जहाँ परंपरागत उपचार मददगार हुए, वहीं कुछ मामलों में लोग हानिकारक प्रथाओं या धोखाधड़ी का शिकार भी हुए हैं — अतः प्रशासन की निगरानी जरूरी है। assamtourism.gov.in
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कमर्शियलाइज़ेशन की आशंका: मयांग की लोक-छवि का अत्यधिक व्यावसायीकरण लोक-संस्कृति को विकृत कर सकता है।
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वैज्ञानिक जांच: पैराबॉर्मल दावों का वैधानिक और वैज्ञानिक परीक्षण सीमित है; इसलिए दावे प्रकाशित स्रोतों पर आधारित होने चाहिए। The Times of India
(कोलकाता हिन्दी न्यूज़; स्रोत: इंडियन कल्चर, स्वराज्य मैग, टाइम्स ऑफ इंडिया, वोकल मीडिया, स्टोरीज बाय सौम्या, मेकमाईट्रिप, होमग्रोन, कल्चर ट्रिप, हिस्टोरिफाइड)
🧾 References / स्रोत (पढ़ने के लिए — मूल लेख/सूत्र)
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Indian Express — “A grandpa who turned people into goats and other stories: How Assam’s ‘black magic’ village is working to break old taboos” (Long Read). The Indian Express
URL: https://indianexpress.com/article/long-reads/assam-black-magic-village-breaking-old-taboos-9524666/ -
NDTV — “How A Tiny Village In Assam Became India’s Black Magic Capital, Complete With A Museum” (feature). www.ndtv.com
URL: https://www.ndtv.com/lifestyle/how-a-tiny-village-in-assam-became-indias-black-magic-capital-complete-with-a-museum-9529390 -
Assam Tourism (official) — Mayong (destination page; tourism info & disclaimer about myths). assamtourism.gov.in
URL: https://assamtourism.gov.in/Mayong.php -
Times of India — Feature on Mayong and paranormal investigators; profile of Navis (paranormal investigator). The Times of India
URL: https://timesofindia.indiatimes.com/city/guwahati/assams-first-paranormal-investigator-makes-a-mark/articleshow/24060104.cms -
International Journal of Social Impact — Exploring Witchcraft and Superstition in Mayong, Assam: Navigating Social Stigma and Unveiling Opportunities in Dark Tourism — Dr. Gaurav Das et al., 2025. International Journal of Social Impact
URL (PDF): https://ijsi.in/wp-content/uploads/2025/07/18.02.040.20251002.pdf -
The Citizen / other features on Mayong (contextual background on myths). The Citizen
नोट: इस रिपोर्ट में वेब-स्रोतों में उपलब्ध प्रकाशित-इंटरव्यू, म्यूज़ियम विवरण और शोध-लेखों पर भरोसा किया है। जहाँ-जहाँ पैरानार्मल दावे या व्यक्तिगत सेवाओं-वाले कमर्शियल लिंक मिले (जैसे ‘Mayong Tantrik contact’ साइट्स), उन्हें स्पष्ट रूप से वाणिज्यिक/अव्यासिक स्रोत के रूप में दर्शाया गया है। ayushrudhra.com+1
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