Congress mp manish tewari

मनीष तिवारी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR पर उठाए सवाल

कोलकाता हिन्दी न्यूज़ | संसद विशेष रिपोर्ट : संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधार पर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील चर्चा हुई। लोकसभा में इस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठाए।

स्पीकर ओम बिरला ने चर्चा शुरू होने से पहले सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे आरोप-प्रत्यारोप से बचें और केवल चुनाव सुधार पर केंद्रित रहें।

🗳️ “लोकतंत्र में मतदाता और राजनीतिक दल सबसे बड़े भागीदार”

चर्चा की शुरुआत में मनीष तिवारी ने कहा कि— लोकतंत्र में मतदाता और राजनीतिक दल सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के लिए एक न्यूट्रल अंपायर की जरूरत थी, इसी उद्देश्य से चुनाव आयोग का गठन हुआ।

उन्होंने याद दिलाया कि राजीव गांधी सरकार ने देश में सबसे बड़ा चुनाव सुधार किया था, जब 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को वोट देने का अधिकार दिया गया।

⚖️ चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

तिवारी ने कहा कि आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने 2023 में बने नए कानून का जिक्र करते हुए कहा कि— इस कानून में सुधार की जरूरत है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति समिति में सरकार और विपक्ष के दो-दो सदस्य होने चाहिए।

इसके अलावा समिति में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि इससे आयोग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

📋 SIR पर बड़ा सवाल

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर बोलते हुए तिवारी ने कहा कि— कई राज्यों में SIR चल रहा है लेकिन चुनाव आयोग के पास कानूनी तौर पर SIR कराने का अधिकार नहीं है।

चुनाव आयोग का दावा है कि उन्हें यह अधिकार सेक्शन 21 से मिलता है। लेकिन तिवारी ने पूरा सेक्शन पढ़कर कहा— न तो संविधान में और न ही किसी कानून में SIR का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में सुधार जरूरी है, लेकिन यह प्रक्रिया कानूनी ढांचे के भीतर होनी चाहिए।

✅ निष्कर्ष

मनीष तिवारी के इन सवालों ने लोकसभा में चुनाव सुधार की बहस को और तीखा कर दिया है। SIR की वैधता, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक हलकों में यह मुद्दे और गहराई से उठने की संभावना है।

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