वाराणसी। मांगलिक वर कन्या की कुंडली में मंगल दोष होने पर ऐसे जातक का विवाह भी मांगलिक कन्या या लड़के से ही करना चाहिए। इसी प्रकार शनि देव यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो या दृष्टिगत भी हो तो कुंडली में मांगलिक योग का परिहार हो जाता है।
सभी मांगलिक कुंडलियों में मांगलिक दोष हो ऐसा जरुरी नहीं होता है, लोग व्यर्थ में मांगलिक योग सुन के भयभीत हो जाते है, जबकि मंगल ग्रह तो शुभ कार्य, भूमि, ऋणहर्ता एवं फल प्रदान करने वाले देवता हैं।
कुंडली में मंगल जब खराब होता है तब इन्सान कुछ नासमझ हो जाता है! ऐसा इन्सान मोम की तरह पिघलता रहता है या पत्थर की तरह रहकर हमेशा दूसरो को चोट देता रहता है। जब-जब मंगल को चन्द्र-सूर्य का साथ नहीं मिलता तब वहा नीच का हो जाता है।
नीच का मंगल सब का शत्रु होता है। जातक धर्म के विरुद्ध काम करता है या करवाता है। फिर ऐसे जातक की मृत्यु हथियार या किसी लम्बी बीमारी से होती है। कुंडली के बैठे कुछ मंगल खराब और कुछ बहुत अच्छे भी होते है।
निवारण : उज्जैन में मंगल भात पूजन इसके अलावा त्वरित उपाय हेतु – मंगल भातपूजन करवाना चाहिए। भात पूजा सम्पूर्ण विश्व में केवल उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में होती है। यहाँ स्कंद पुराण में अवंतिका खंड के अनुसार भगवान शिव के मस्तक के पसीने की बूंद पृथ्वी पर उज्जैन अवन्तिका क्षेत्र में गिरने से भगवान श्री महामंगल का जन्म हुआ।
स्वयंभू महामंगल अंगारेश्वर महादेव के लालवर्ण वाले रक्ताक्ष, भूमिपुत्र आदि नामो से जाने जाते हैं। भगवान श्री महामंगल के मंदिर के शिखर से कर्क रेखा गुजरती है और ये मंदिर अति प्राचीन है, यहाँ करवाई गयी पूजा से मंगल दोष का निवारण होता है।
ज्योतिर्विद रतन वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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