Mamata Banerjee ED and Supreme Court1

ममता बनर्जी बनाम ईडी: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख से बंगाल सरकार को बड़ा झटका

कोलकाता/नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल में ED-I-PAC रेड विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ा झटका दिया है।

कोलकाता में I-PAC ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पर 8 जनवरी को ED की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के पहुंचने और फाइलें ले जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच में दखल मानते हुए राज्य सरकार पर सख्त टिप्पणी की।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ममता स्वयं आरोपी हैं और डीजीपी ने सहयोगी की भूमिका निभाई। कोर्ट ने इस मामले में बंगाल सरकार को 5 बड़े झटके दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को 5 बड़े झटके

  1. ED अधिकारियों पर दर्ज 4 FIR पर रोक: सुप्रीम कोर्ट ने ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की कार्यवाही पर रोक लगा दी।
  2. राज्य एजेंसियों को केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की एजेंसियों को केंद्रीय जांच में दखल का कोई अधिकार नहीं है।
  3. बंगाल सरकार से जवाब तलब: सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार और पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा।
  4. डीजीपी राजीव कुमार और कमिश्नर मनोज वर्मा पर सस्पेंशन की मांग पर नोटिस: कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और ममता सरकार से डीजीपी-कमिश्नर के सस्पेंशन पर राय मांगी।
  5. CCTV सुरक्षित रखने का निर्देश: कोर्ट ने घटनास्थल से जुड़े सभी CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को सुरक्षित रखने का आदेश दिया।

SC mamata ED

🚫 “राज्य एजेंसियों को केंद्रीय जांच में दखल का अधिकार नहीं”

सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि—

  • ED को किसी पार्टी या चुनावी गतिविधि में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है,

  • लेकिन राज्य सरकार की एजेंसियों को भी केंद्रीय जांच में दखल देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने अपने आदेश में ईडी की उस दलील को भी रिकॉर्ड में लिया, जिसमें कहा गया कि TMC की लीगल सेल ने 9 जनवरी को हाईकोर्ट में भीड़ जुटाने के लिए व्हाट्सऐप मैसेज भेजे, जिससे अदालत परिसर में अव्यवस्था की स्थिति बनी।

Mamata ED High Court

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका हो सकती है और इसकी जांच होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच में घबराहट और गैरकानूनी दखल को गंभीर माना। ED ने आरोप लगाया कि ममता ने दस्तावेज और डिजिटल सबूत जबरन छीने। TMC ने इसे “राजनीतिक साजिश” बताया। यह फैसला 2026 चुनाव से पहले ममता सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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