TMC's 'Martyr's Day' rally in Kolkata, CM Mamata Banerjee will address the public meeting

न्यायिक निर्णय प्रक्रिया में नाम हटने वाले मतदाताओं को TMC देगी कानूनी मदद : ममता

पांडवेश्वर (पश्चिम बर्दवान), 26 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को पांडवेश्वर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए एक अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के नाम न्यायिक प्रक्रिया में हटा दिए जाएंगे, उन्हें तृणमूल कांग्रेस कानूनी सहायता प्रदान करेगी।

ममता बनर्जी ने स्पष्ट रूप से कहा: “जिन वोटरों के नाम न्यायिक प्रक्रिया में हटा दिए जाएंगे, उन्हें तृणमूल कांग्रेस की तरफ से कानूनी मदद दी जाएगी। हम उनके लिए वकीलों का इंतजाम करेंगे।”

SIR प्रक्रिया पर ममता का हमला

ममता बनर्जी ने एक बार फिर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा चुनावी धांधली के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने कहा: “वे लॉकडाउन का सहारा भी ले सकते हैं, जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था। लेकिन हमें लड़ना आता है। अगर हम महामारी के दौरान लड़ पाए थे, तो हम अब भी लड़ पाएंगे।

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मुख्यमंत्री ने इस चुनाव को ‘कुरुक्षेत्र का महायुद्ध’ बताया और कहा कि तृणमूल कांग्रेस पांडवों का प्रतिनिधित्व कर रही है, जबकि भाजपा कौरवों की भूमिका में है।

महिलाओं को आगे आने का आह्वान

ममता बनर्जी ने महिलाओं से खास अपील की। उन्होंने कहा: “वे हम पर चाहे जैसे भी हमले करें, लेकिन आखिर में जीत तृणमूल कांग्रेस की ही होगी। इस प्रक्रिया में महिलाओं को आगे बढ़कर मुख्य भूमिका निभानी होगी।

एलपीजी बुकिंग नियम पर तंज

ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर एलपीजी बुकिंग के नए नियमों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा: “कल मैंने सुना कि गैस बुकिंग की अवधि घटाकर 25 दिन कर दी गई है। मुझे नहीं पता कि यह सच है या नहीं; मुझे उन पर भरोसा नहीं है। आप 25 दिन से पहले बुकिंग नहीं कर सकते! अगर लोगों की गैस खत्म हो गई तो वे क्या करेंगे?

SIR में अब तक कितने नाम कटे?

चुनाव आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया में 60 लाख से ज्यादा मामलों की जांच चल रही है। इनमें से 32 लाख मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, जिसमें लगभग 13 लाख नाम हटाए जा चुके हैं। कुल मिलाकर अब तक 76 लाख नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं।

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रत्ना देबनाथ (आरजी कर पीड़िता की मां) की उम्मीदवारी और SIR विवाद के बीच ममता बनर्जी का यह भाषण TMC के लिए एक रक्षात्मक और आक्रामक दोनों रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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