Gangasagar

ममता बनर्जी ने सागर द्वीप को जोड़ने वाले ‘गंगासागर सेतु’ की आधारशिला रखी

सागर द्वीप (पश्चिम बंगाल) | 5 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को सागर द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित ‘गंगासागर सेतु’ की आधारशिला रखी।

यह पुल मुरीगंगा नदी पर बनेगा और सागर द्वीप को हर मौसम में सड़क मार्ग से जोड़ने वाला राज्य का एक अहम बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट होगा। करीब पांच किलोमीटर लंबे इस पुल के निर्माण पर लगभग 1,670 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

अधिकारियों के मुताबिक, गंगासागर सेतु के पूरा होने के बाद सागर द्वीप, जो हुगली नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित है, पहली बार स्थायी सड़क संपर्क से जुड़ जाएगा।

Mamata ganga

पुल का महत्व – गंगासागर मेले के लिए क्रांतिकारी बदलाव

  • सागर द्वीप पर हर साल मकर संक्रांति (14 जनवरी) को गंगासागर मेला आयोजित होता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करने और कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
  • फिलहाल द्वीप तक पहुंच नौका सेवा से ही संभव है, जो ज्वार-भाटे, मौसम और मेले की भारी भीड़ के कारण अक्सर बाधित हो जाती है।
  • पुल बनने से हर मौसम में सड़क संपर्क उपलब्ध होगा, जिससे तीर्थयात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

दो साल में पूरा होने की उम्मीद

आधारशिला कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल सरकार और निर्माण कार्य का ठेका पाने वाली कंपनी लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (L&T) के बीच औपचारिक रूप से दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। अधिकारियों ने बताया कि पुल का निर्माण कार्य दो वर्षों के भीतर पूरा किए जाने की उम्मीद है।

गंगासागर मेले के लिए बड़ी राहत

दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित सागर द्वीप पर हर वर्ष गंगासागर मेला आयोजित होता है। मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को देशभर से लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करने और कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए यहां पहुंचते हैं।

वर्तमान में सागर द्वीप तक पहुंचने का एकमात्र साधन नौका सेवाएं हैं, जो गंगासागर मेले के दौरान भारी भीड़ और ज्वार-भाटे की स्थिति के कारण अक्सर बाधित हो जाती हैं।

गंगासागर सेतु के निर्माण से तीर्थयात्रियों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को भी सालभर सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।

बुनियादी ढांचे को मिलेगा नया आयाम

राज्य सरकार का कहना है कि यह परियोजना न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि सागर द्वीप और आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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