Mamata Banerjee

चुनाव आयोग के खिलाफ कोर्ट जाऊंगी, खुद करूंगी केस की पैरवी: ममता बनर्जी

कोलकाता | 6 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि वह इस कथित “अमानवीय” प्रक्रिया के खिलाफ अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगी।

दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता ने ऐलान किया कि वह जरूरत पड़ी तो खुद अदालत में जाकर इस मामले की पैरवी करेंगी।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी फैलाई जा रही है, जिसके चलते कई लोगों की जान गई है और अनेक लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं।

उन्होंने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को अधिकार से वंचित करने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग किया जा रहा है।

“खुद हूं वकील, जनता की तरफ से लड़ूंगी”

ममता बनर्जी ने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि एक आम नागरिक की तरह पेश होने की अनुमति मांगूंगी। अगर जरूरत पड़ी तो खुद केस लड़ूंगी और जनता की आवाज बनूंगी।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने कानून की पढ़ाई की है और अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगी।

चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाने के लिए AI और अनौपचारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को “व्हाट्सएप से चलाया जा रहा है” और जमीनी हकीकत से कटकर फैसले लिए जा रहे हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए ममता ने तीखे लहजे में कहा, “अगर लोगों के अधिकार छीने गए, तो आप भी गायब हो जाएंगे।”

SIR से 70 मौतों का दावा

ममता बनर्जी ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद पिछले दो महीनों में करीब 70 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से बीमार, बुजुर्ग और दिव्यांग लोगों को भी मतदान केंद्रों पर अपनी वैधता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा किया जा रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया, “अगर आपकी 85 साल की मां को एम्बुलेंस से उतारकर लाइन में खड़ा किया जाए, तो दिल्ली के नेता क्या जवाब देंगे?”

ममता के प्रमुख आरोप

  • बिना ठोस कारण के मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं
  • SIR अब लोगों को डराने का औजार बन गया है
  • शादी, पता बदलने या नाम की वर्तनी में मामूली अंतर पर नाम काटे जा रहे हैं
  • भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषियों के साथ भेदभाव हो रहा है
  • AI यह तय कर रही है कि कौन शादी के बाद कहां गया और किसका सरनेम बदला

11 राज्यों में 3.69 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर

देशभर में अब तक 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी SIR ड्राफ्ट सूची से 3.69 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं

पश्चिम बंगाल में यह संख्या 58.20 लाख तक पहुंच गई है, जो सबसे बड़ा आंकड़ा बताया जा रहा है। तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी लाखों नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं।

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