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बाढ़ राहत में 100 करोड़ का घोटाला; CAG रिपोर्ट में मालदा अनियमितताओं का खुलासा

कोलकाता, 3 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल में 2017 की बाढ़ राहत फंड वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने से राजनीतिक हंगामा मच गया है।

कलकत्ता हाई कोर्ट में पेश की गई 700 पेज की CAG रिपोर्ट ने मालदा जिले में करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले के संकेत दिए हैं।

भाजपा ने इसे तृणमूल कांग्रेस सरकार की संस्थागत भ्रष्टाचार का नमूना बताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला है।

रिपोर्ट में एक ही व्यक्ति को 42 बार मुआवजा, पक्के मकानों को क्षतिग्रस्त बताकर भुगतान और बिना आवेदन के राशि वितरण जैसे गंभीर मामले उजागर हुए हैं।

CAG रिपोर्ट में क्या खुलासे हुए?

रिपोर्ट के अनुसार, मालदा में बाढ़ राहत फंड के वितरण में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां मिलीं। 6,965 लोगों को एक ही बैंक अकाउंट में दो से लेकर 42 बार तक मुआवजा दिया गया।

एक मामले में हरिश्चंद्रपुर-2 ब्लॉक में एक व्यक्ति को 42 बार भुगतान किया गया। इसके अलावा, 108 जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों को बीपीएल श्रेणी का लाभ दिया गया, जबकि वे नियमित वेतन पा रहे थे।

7 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि उन लोगों को दी गई जो कभी आवेदन ही नहीं किए थे। ब्लॉक ऑफिस से कई फाइलें गायब मिलीं, जो साजिश की ओर इशारा करती हैं।

भाजपा का तीखा हमला

भाजपा ने इसे “राज्य प्रायोजित डकैती” करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि असली बाढ़ पीड़ितों को राहत नहीं मिली, जबकि प्रभावशाली लोगों और TMC से जुड़े व्यक्तियों ने फंड लूट लिया।

“TMC का DNA चोरी और चिटफंड कल्चर पर आधारित है। ममता सरकार गरीबों से चोरी कर रही है।” भाजपा ने इसे बाढ़ पीड़ितों के साथ विश्वासघात बताया और कहा कि जनता 2026 चुनाव में इसका जवाब देगी।

एक ही मकान पर 42 बार मुआवजा का मामला

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला उदाहरण एक व्यक्ति का है, जिसे एक ही मकान के लिए 42 बार मुआवजा दिया गया। पक्के मकानों को क्षतिग्रस्त बताकर करोड़ों का फर्जी भुगतान किया गया।

भाजपा ने आरोप लगाया कि यह लूट ऊपर से नीचे तक TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के संरक्षण में हुई। हर विभाग में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार संस्थागत हो चुका है।

पीड़ितों के हक पर डाका

भाजपा ने कहा कि बाढ़ पीड़ित पहले से ही घर और सामान खोने से त्रस्त थे, लेकिन उनकी राहत राशि भी TMC नेताओं ने हड़प ली।

“ममता मां, माटी, मानुष की बात करती हैं, लेकिन उनके नेता गरीबों का हक मार रहे हैं।”

पार्टी ने मांग की कि इस घोटाले की CBI जांच हो और दोषियों को सजा मिले।

चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा

2026 विधानसभा चुनाव से पहले यह रिपोर्ट TMC के लिए बड़ा झटका है। भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम का हथियार बना रही है।

TMC ने अभी तक आधिकारिक जवाब नहीं दिया, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पार्टी इसे पुराना मामला बताकर खारिज कर सकती है। क्या यह घोटाला चुनावी समीकरण बदल देगा? जनता का फैसला आने वाला समय बताएगा।

आप क्या सोचते हैं – यह संस्थागत भ्रष्टाचार है या पुरानी गड़बड़ी? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!

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