वाराणसी। सोमवती अमावस्या का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। चूंकि यह अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, इसलिए इसे सौभाग्य और पितृ दोष से मुक्ति के लिए उत्तम माना गया है।
इस दिन किए जाने वाले प्रमुख उपाय और धार्मिक परंपराएं निम्नलिखित हैं:
1. पीपल वृक्ष की पूजा (सबसे महत्वपूर्ण उपाय) : सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष विधान है।
परिक्रमा : पीपल के पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत (सफेद धागा) लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करें। ऐसा माना जाता है कि इससे सुख-समृद्धि बनी रहती है।
जल अर्पण : पीपल की जड़ में कच्चा दूध और जल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर अपनी मनोकामना कहें।
2. पितृ दोष शांति और तर्पण : यदि कुंडली में पितृ दोष है या पितरों की कृपा चाहते हैं, तो यह दिन श्रेष्ठ है।
तर्पण : किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने के बाद अपने पितरों के निमित्त तर्पण करें।
दान : इस दिन काले तिल, गुड़, चने की दाल, कपड़े और छाता-जूते का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।
3. शिव-पार्वती की पूजा : सोमवार का दिन शिवजी को समर्पित होता है, इसलिए शिवलिंग पर कच्चे दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
4. आर्थिक उन्नति के लिए सफेद वस्तुओं का दान : घर की सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि के लिए चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान करें।
चींटियों को भोजन : इस दिन चींटियों को आटा और चीनी मिलाकर खिलाना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।
5. कुछ जरूरी सावधानियां :
सात्विकता : इस दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) का सेवन बिल्कुल न करें।
शांति : घर में कलह न होने दें और मन में नकारात्मक विचार न लाएं।
सफाई : घर की पूरी तरह से सफाई करें, क्योंकि अमावस्या के दिन पितर घर में आते हैं, इसलिए घर का वातावरण स्वच्छ और पवित्र रखें।
सूचना : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से मानसिक शांति और पारिवारिक उन्नति प्राप्त होती है।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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