माघी पूर्णिमा व्रत आज

पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री, वाराणसी : 16 फरवरी 2022 बुधवार हिंदू धर्म में हर माह पड़ने वाली पूर्णिमा का विशेष महत्व है। हर माह की आखिरी तिथि पूर्णिमा होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान किया जाता है। माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन का शास्त्रों में विशेष महत्व है। इस दिन शाही स्नान किया जाता है। माघी पूर्णिमा के दिन गंगा तट पर उत्सव जैसा माहौल होता है। इस दिन पूजा, जप, तप और दान का खास विधान है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और जप-तप आदि से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। वहीं, मृत्यु के बाद व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

माघी पूर्णिमा तिथि : पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा तिथि 16 फरवरी सुबह 9 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी की रात 10 बजकर 55 मिनट पर समापन होगा। 16 फरवरी के दिन भक्त सुबह के समय गंगा समेत किसी भी पवित्र नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। वहीं, घर में भी नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान किया जा सकता है।

माघी पूर्णिमा पूजन विधि : अगर पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल युक्त पानी से स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद सबसे पहले भगवान भास्कर को ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र के जाप के साथ जल का अर्घ्य अर्पित करें। सूर्य के सामने खड़े होकर जल में तिल डालें और तर्पण करें। बता दें कि सूर्य देव की पूजा चरणामृत, पान, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, फल, फूल, पंचगव्य, सुपारी, दूर्वा आदि से की जाती है। आखिर में आरती-प्रार्थना करें और पूजा संपन्न करें। पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को दान दक्षिणा दें। संभव हो तो ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है।

पौराणिक कथा : पौराणिक कथा के अनुसार, चिरकाल में एक बार जब भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीर सागर में विश्राम कर रहे थे। उस समय नारद जी वहां पधारे। नारद जी को देख भगवान श्रीहरि विष्णु बोले- हे महर्षि आपके आने का प्रयोजन क्या है? तब नारद जी बोले-नारायण नारायण प्रभु! आप तो पालनहार हैं। सर्वज्ञाता हैं। प्रभु-मुझे ऐसी कोई लघु उपाय बताएं, जिसे करने से पृथ्वीवासियों का कल्याण हो। तदोपरांत, भगवान श्रीहरि विष्णु बोले- हे देवर्षि! जो व्यक्ति सांसारिक सुखों को भोगना चाहता है और मरणोपरांत परलोक जाना चाहता है। उसे सत्यनारायण पूजा अवश्य करनी चाहिए। इसके बाद नारद जी ने भगवान श्रीहरि विष्णु से व्रत विधि बताने का अनुरोध किया। तब भगवान श्रीहरि विष्णु जी बोले- इसे करने के लिए व्यक्ति को दिन भर उपवास रखना चाहिए। संध्याकाल में किसी प्रकांड पंडित को बुलाकर सत्य नारायण की कथा श्रवण करवाना चाहिए। भगवान को भोग में चरणामृत, पान, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, फल, फूल, पंचगव्य, सुपारी, दूर्वा आदि अर्पित करें। इससे सत्यनारायण देव प्रसन्न होते हैं।

पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री

जोतिर्विद वास्तु दैवज्ञ 
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
9993874848

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