18 जनवरी से शुरू हो रहा है माघ मास, जानिए माघ पूर्णिमा का पौराणिक महत्व

फोटो साभार : गुगल

पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री, वाराणसी : माघ मास २०२२: पौष के बाद माघ माह प्रारंभ होगा। इस मास का प्रारंभ १८ जनवरी से होगा। इस माह के प्रारंभ होते ही मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे और गंगा-यमुना के किनारे माघ मेले का प्रारंभ भी हो जाएगा। माघ माह में पूर्णिमा के दिन का खास महत्व होता है।

1. माघ मास या माघ पूर्णिमा को संगम में स्नान का बहुत महत्व है। संगम नहीं तो गंगा, गोदावरी, कावेरी, नर्मदा, कृष्णा, क्षिप्रा, सिंधु, सरस्वती, ब्रह्मपुत्र आदि पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए।

प्रयागे माघमासे तुत्र्यहं स्नानस्य यद्रवेत्।
दशाश्वमेघसहस्त्रेण तत्फलं लभते भुवि।।

प्रयाग में माघ मास के अन्दर तीन बार स्नान करने से जो फल होता है वह फल पृथ्वी में दस हजार अश्वमेघ यज्ञ करने से भी प्राप्त नहीं होता है।

2. माघे निमग्नाः सलिले सुशीते विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति।’

पद्मपुराण में माघ मास के माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा गया है कि पूजा करने से भी भगवान श्रीहरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी कि माघ महीने में स्नान मात्र से होती है। इसलिए सभी पापों से मुक्ति और भगवान वासुदेव की प्रीति प्राप्त करने के लिए प्रत्येक मनुष्य को माघ स्नान करना चाहिए।

3. ‘प्रीतये वासुदेवस्य सर्वपापानुत्तये। माघ स्नानं प्रकुर्वीत स्वर्गलाभाय मानवः॥’

माघ मास में पूर्णिमा को जो व्यक्ति ब्रह्मावैवर्तपुराण का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। माघ में ब्रह्मवैवर्तपुराण की कथा सुननी चाहिए और यदि यह संभव न हो सके तो माघ महात्म्य अवश्य सुनना चाहिए।

4. हर की पौड़ी :- हरिद्वार में ब्रह्मकुंड को हर की पौड़ी भी कहा जाता है। यह सबसे खास घाट माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि यहीं पर समुंद्र मंथन के दौरान अमृत की बूंदें कलश से छलक कर गिरीं थीं। कहा जाता है कि यहां पर डुबकी लगाने से करोड़ों जन्मों का पुण्य प्राप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

5. स्नान :- माघ मास में यहां स्नान करने से अर्थ काम मोक्ष और धर्म चारों की प्राप्ति हो जाती है। इस स्थान पर स्नान करने से कभी भी मनुष्य की अकाल मृत्यु नहीं होती। इसी घाट पर विष्णु के पद चिन्ह होने की बात भी कही जाती है। माघ पूर्णिमा के दिन विधिवत स्नान करने और मां गंगा की पूजा करने से जातक की सभी तरह की मनोकामनापूर्ण होती है।

6. माघ पूर्णिमा :- पूर्णिमा के दिन जल और वातावरण में विशेष ऊर्जा आ जाती है। माघ पूर्णिमा पर इस बार शनि और गुरु का संयोग रहेगा। सूर्य और शुक्र का संयोग भी बना रहेगा। इसीलिए इस दिन स्नान का ज्यादा महत्व है। अत: इस दिन विधिवत स्नान और दान से चंद्र दोष दूर होकर सभी ग्रहों का अच्छा प्रभाव मिलता है। इस दिन सभी ग्रहों के वस्तुओं का दान करना चाहिए ताकि निरोग की प्राप्त हो।

7. देवता आते हैं धरती पर :- मान्यता है कि माघ माह में देवता धरती पर आकर मनुष्य रूप धारण करते हैं और प्रयाग में स्नान करने के साथ ही दान और जप करते हैं। इसीलिए प्रयाग में स्नान का खास महत्व है। जहां स्नान करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।

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जोतिर्विद वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
9993874848

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