कोलकाता हिन्दी न्यूज | 21 जुलाई 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवाद के बीच कामारहाटी के विधायक मदन मित्र ने एक बार फिर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोला।
कोलकाता के मेयो रोड पर आयोजित शहीद दिवस सभा में उन्होंने ममता बनर्जी से अभिषेक का साथ छोड़कर “असल तृणमूल” में शामिल होने की अपील की।
‘पुत्र मोह स्वीकार कीजिए’
सभा को संबोधित करते हुए मदन मित्र ने कहा कि ममता बनर्जी को यह स्वीकार करना चाहिए कि वह “पुत्र मोह” में थीं। उन्होंने कहा,
“अभिषेक को छोड़कर हमारे साथ आइए। हम आपको एक महीने का समय दे रहे हैं। एक बार स्वीकार कर लीजिए कि आप पुत्र स्नेह में अंधी हो गई थीं। आपके सिर पर एक भी अंडा नहीं पड़ेगा, हम आपका सम्मान करेंगे।”
उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
हाल ही में बदला था खेमा
कुछ दिन पहले ही मदन मित्र ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से दूरी बनाकर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले “असल तृणमूल” खेमे का दामन थामा था।
विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से नए गुट में शामिल होने की घोषणा की थी। उसी समय उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में टूट की सबसे बड़ी वजह अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली है।
अभिषेक बनर्जी पर फिर साधा निशाना
मदन मित्र ने अपने भाषण में अभिषेक बनर्जी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें धमकाने से कोई फायदा नहीं होगा।
उन्होंने कहा, “डायमंड हार्बर मॉडल से और लोगों को डराया जा सकता है, लेकिन मुझे नहीं। मैं किसी से डरने वाला नहीं हूं। पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा संघर्ष मैंने किया है। 27 महीने जेल में रहने के बाद भी मैं तीन गुना वोटों से चुनाव जीता।”
इससे पहले भी उन्होंने अभिषेक बनर्जी के चार्टर्ड विमान से यात्रा करने को लेकर सवाल उठाए थे।
अभिषेक ने भी बागी नेताओं पर किया पलटवार
दूसरी ओर, तारामंडल में आयोजित सभा से अभिषेक बनर्जी ने भी पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, यदि वे भविष्य में वापस आना चाहें तो उन्हें दोबारा शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
अभिषेक ने यह भी दोहराया कि यदि कोई बागी नेता वापस लौटता है तो वह एक घंटे के भीतर अपना पद छोड़ देंगे, लेकिन उन्हें भरोसा है कि ऐसा नहीं होगा।
बढ़ती राजनीतिक तल्खी
21 जुलाई के शहीद दिवस कार्यक्रम के दौरान दोनों गुटों के बीच बयानबाजी ने स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संघर्ष अभी थमता नजर नहीं आ रहा। आने वाले दिनों में इन राजनीतिक घटनाक्रमों पर सभी की नजर रहेगी।
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