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श्री शनिदेव 26 जुलाई, रविवार से वक्री हो गए हैं

वाराणसी। नवग्रहों में सबसे प्रभावशाली ग्रह माने जाने वाले भगवान श्री शनिदेव 26 जुलाई 2026, रविवार को देर रात्रि 1:25 बजे मीन राशि में वक्री हो गए हैं। वे 11 दिसंबर 2026 को प्रातः 5:58 बजे पुनः मार्गी होंगे। इस संबंध में शास्त्री ने बताया कि शनि की वक्री अवस्था लगभग 138 दिनों तक रहेगी।

शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। जब शनि वक्री अवस्था में होते हैं, तब उनका प्रभाव और अधिक गहन माना जाता है।

शनि का संबंध कर्म, सेवा, अनुशासन, नौकरी, व्यवसाय तथा सामाजिक न्याय से है। इसलिए उनकी चाल में परिवर्तन का प्रभाव करियर, स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन एवं आर्थिक स्थिति सहित जीवन के अनेक क्षेत्रों में दिखाई देता है।

किन राशियों पर रहेगा विशेष प्रभाव?
वर्तमान में कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। कुंभ राशि पर अंतिम चरण, मीन राशि पर दूसरा चरण तथा मेष राशि पर प्रथम चरण प्रभावी है। वहीं सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। जिन जातकों की कुंडली में शनि की महादशा या अंतर्दशा चल रही है, उन्हें भी विशेष सावधानी एवं संयम रखने की आवश्यकता है।

राशिनुसार वक्री शनि का प्रभाव एवं उपाय
मेष : द्वादश भाव में वक्री शनि के कारण खर्चों में वृद्धि, करियर में रुकावट, आर्थिक अस्थिरता तथा कार्यस्थल की राजनीति से तनाव बढ़ सकता है।
उपाय : काले कुत्ते को रोटी खिलाएं।

वृष : यह समय लाभकारी रहेगा। रुका हुआ धन मिलने, करियर में उन्नति, विदेश यात्रा तथा नौकरी के नए अवसर मिलने के योग हैं।
उपाय : शनिवार को काले वस्त्र दान करें।

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मिथुन : मेहनत के अनुरूप फल मिलने में विलंब, पारिवारिक तनाव तथा करियर को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है।
उपाय : प्रतिदिन शिव चालीसा का पाठ करें।

कर्क : प्रेम, करियर एवं आर्थिक क्षेत्र में लाभ, संपत्ति से फायदा तथा आत्मविश्वास में वृद्धि के योग बनेंगे।
उपाय : शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें।

सिंह : अष्टम भाव में वक्री शनि दुर्घटना, कार्य में बाधा तथा पारिवारिक तनाव का संकेत देते हैं।
उपाय : शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें तथा वाहन सावधानीपूर्वक चलाएं।

कन्या : वैवाहिक जीवन में मतभेद, साझेदारी में तनाव तथा सामाजिक संबंधों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
उपाय : शनिवार को काले तिल का दान करें।

तुला : छठे भाव में वक्री शनि रोग, ऋण तथा शत्रुओं से संबंधित परेशानियां बढ़ा सकते हैं।
उपाय : रक्तचाप एवं त्वचा संबंधी समस्याओं के प्रति सजग रहें तथा शनि स्तोत्र का पाठ करें।

वृश्चिक : यह समय भाग्यवर्धक रहेगा। अचानक धन लाभ, व्यापार में सफलता, विदेश से आय तथा पारिवारिक सुख के योग बनेंगे।
उपाय : शनि बीज मंत्र का जप करें।

धनु : धैर्य की परीक्षा होगी। करियर में बाधाएं, खर्चों में वृद्धि तथा अनैतिक कार्यों से हानि की संभावना रहेगी।
उपाय : “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।

मकर : तृतीय भाव में वक्री शनि मेहनत का पूरा फल देंगे। रुका हुआ धन प्राप्त होगा, भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा तथा विदेश यात्रा के योग बनेंगे।
उपाय : शनिदेव को काले तिल अर्पित करें।

कुंभ : धन भाव में वक्री शनि आर्थिक अस्थिरता, पारिवारिक मतभेद तथा गले एवं दांत संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।
उपाय : काली गाय की सेवा करें।

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मीन : रुके हुए कार्यों में विलंब, पारिवारिक सुख में कमी तथा माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी रह सकती है।
उपाय : शनिवार को पीपल के वृक्ष की पूजा करें।

शनिदेव को प्रसन्न करने के प्रभावी उपाय :
शनिवार को काली गाय की सेवा करें तथा काला कंबल, काले वस्त्र, काले उड़द, सप्तधान्य एवं फल आदि का दान करें।

भगवान हनुमान को चमेली के तेल का दीपक अर्पित करें तथा हनुमान चालीसा का पाठ करें।

शनिदेव के दस नाम : कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद एवं पिप्पलाद का श्रद्धापूर्वक जप करें।

काले घोड़े की नाल से बनी अंगूठी शनिवार के दिन मध्यमा अंगुली में धारण करें।
शमी वृक्ष की जड़ को श्रवण नक्षत्र में अभिमंत्रित कर धारण करें।

पीपल के वृक्ष की पूजा करें तथा उसमें तिल का तेल अर्पित करें।
लगातार 43 शनिवार तक शनिदेव को तिल का तेल अर्पित करें।
बंदरों एवं कुत्तों को गुड़ और काले चने खिलाएं।

शनिदेव के प्रमुख मंत्र :
1. वैदिक मंत्र
ॐ शन्नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
शं योरभि स्रवन्तु नः॥

2. बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥

3. दशनाम स्तुति
कोणस्थः पिङ्गलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रोऽन्तको यमः।
सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः॥

4. तंत्रोक्त मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
विशेष: मान्यता के अनुसार इन मंत्रों का 23,000 बार जाप किसी विद्वान ब्राह्मण से करवाना विशेष फलदायी माना जाता है।

ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848

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“पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री वैदिक ज्योतिष के विद्वान हैं। वे दैनिक राशिफल, पंचांग, मुहूर्त, धर्म-कर्म और शुभ-अशुभ योगों पर विस्तृत जानकारी देते हैं। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के गहन अध्ययन के साथ वे पाठकों को सरल भाषा में उपयोगी ज्योतिषीय सलाह प्रदान करते हैं।”

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