तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। इस रक्त संकट की घड़ी में मानवता की अनमोल ज्योत जलाने वाला एक महत्त्वपूर्ण आयोजन सम्पन्न हुआ, जब जीवनदायिनी नदियों की तरह बहते रक्त की धाराओं को पुनः प्रबल करने हेतु एक विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
जैसे सूखे पत्तों पर अमृत की बूंदें जीवनदान करती हैं, वैसे ही यह प्रयास अस्पताल के रक्त भंडार में जीवन की नई संजीवनी समाहित कर गया।
इस अनमोल कार्य में अनेक वीर हृदयों ने अपने करुणामयी रक्त के प्यालों से न केवल एक-दूसरे का पालन-पोषण किया, अपितु मानवीय सेवा में निष्ठा का नया अध्याय उद्घाटित किया।

संसाधनों की व्यघात के इस काले बादल के बीच, यह रक्तदान शिविर एक सुनहरी किरण की भाँति उभरा, जिसने चिकित्सा क्षेत्र की मशीनरी को निरंतर गतिशील रखने का विश्वास ठान लिया।
नजदीकी क्षेत्रों के सहयोगी भी इस मानवता के पर्व में साथ हो कर ऐसे समर्पण और संकल्प की माला बांधी, जो अश्वेत-धुंध की तरह छाए संकट को चिरकाल तक नगण्य कर देगा।
इस आयोजन के माध्यम से यह प्रतिज्ञा पुन: स्थापित हुई कि जब रक्त वृक्ष की शाखाएं सूख जाएंगी, तब यह सेवाभावी वृंद जीवन की नदी पुनः प्रवाहित करेगा।
अतः यह रक्तदान उत्सव केवल एक कार्यक्रम न रह कर, मानवता के प्रति अपार सम्मान और समर्पण की श्रेष्ठतम प्रतिमूर्ति बनकर उभरा। यह प्रयास निरंतर प्रज्वलित रहेगा, मानो जीवन के अमर संगीत में एक अनुगूँज बन कर घटित होता रहे।
आयोजन में मेदिनीपुर जिला वॉलेंटरी ब्लड डोनर्स फोरम के समन्वय में रक्त संकट पर विजय, गौतम चक्रवर्ती, जगदीश माईती, मृत्युंजय सामंत व शुभ्र प्रकाश मंडल का सक्रिय योगदान रहा।
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