आइये, हमलोग दीपावली पर्व मनाएँ

श्रीराम पुकार शर्मा, कोलकाता : दीपावली मूलतः अंधकार पर प्रकाश की और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रकाशीय प्रतीकात्मक सनातनी पर्व है। इस पंच दिवसीय प्रकाश पर्व का शुभारम्भ धनतेरस से ही हो जाता है और फिर भाई-दूज पर जाकर पूर्ण होता है। लोग मिट्टी के जलते दीयों से विभिन्न रंग-बिरंगी रंगोली से घर-आँगन को सजाते हैं।

श्रीराम पुकार शर्मा

‘धनतेरस’ के दिन लोग सौभाग्य के संकेत के रूप में बर्तन, गहने आदि खरीदते हैं और स्वस्थता, सुख, सम्पदा व समृद्धि की कामना करते हैं।
‘नरक चतुर्दशी’ के दिन लोग अपने घरों को तेल के दीयों से रौशनी कर ‘यम’ को वहीँ से वापस चले जाने की कामना करते हैं। फिर दीपावली के दिन घर-आँगन को दीयों से प्रकाशित कर ‘लक्ष्मी की पूजा’ कर लोग धन की देवी से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

‘गोवेर्धन पूजा’ पर लोग कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में भगवन कृष्ण को विविध प्रकार के शाकाहारी भोजन का भोग लगाते हैं। ‘भाई दूज’ पर भाई-बहन एक दूसरे से प्यार से मिलते हैं और प्यार की निशानी के रूप में उपहारों का आदान-प्रदान किया करते हैं। भारत के कई हिस्सों में भगवान् श्रीराम द्वारा राक्षसराज रावण को हरा कर अयोध्या लौटने के प्रतीक के तोर पर प्रकाश पर्व दीपावली त्यौहार मनाया जाता है। मिटटी के दीयों को जलाकर घरों को सजा कर ख़ुशी मनाई जाती है।

प्रकाश पर्व का त्यौहार भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर रक्षक को पराजित कर जीत की प्राप्ति का भी प्रतीक स्वरूप मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन उन्होंने 16 हजार महिलाओं को नरकासुर के बंदी जीवन से मुक्त करवाया था।
यह भी माना जाता है कि आज के ही दिन समुद्र मंथन के दौरान देवी श्रीलक्ष्मी सोने का पात्र लेकर निकली थीं। इसीलिए दीवाली के दिन श्रीलक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है।

जैन धर्म अनुयायियों के लिए दिवाली महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त करने के दिन के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने 527 ईसा पूर्व इसी दिवाली के दिन ही निर्वाण और सांसारिक इच्छाओं से मुक्ति प्राप्त की थी। इस दिन जैन मन्दिरों को भी रौशनी से सजाया जाता है और मिठाई तथा दीये बाँटे जाते हैं।

सिख धर्म का भी दीपावली पर्व से काफी घनिष्ट सम्बन्ध है। सिखों के छठे गुरु हर गोविन्द सिंह जी के ‘बंधन मुक्त दिवस’ के प्रतीक के रू में मनाया जाता है। इसी दिन मुग़ल सम्राट द्वारा उन्हें कारावास से मुक्त किया गया था, उनकी वापसी को सिखों द्वारा ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

बौद्ध धर्म के अनुयायी सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म ग्रहण करने सम्बन्धित की घटना के प्रतीक के रूप में मनाते हैं। इस दिन मठों और मन्दिरों को जलते दीयों से सजाया जाता है और भगवान बुद्ध की पूजा की जाती है।

भारतीय किसान दिवाली को खरीफ फसल की तैयारी की ख़ुशी के रूप में मनाते हैं। इस समय को खरीफ के मौसम के रूप जाना जाता है। इस वक्त धान की फसल की कटाई के लिए तैयारी होने लगाती है। भारत की तरह ही दुनिया के कई हिस्सों में दीपावली पर्व या इसी के समान प्रकाश उत्सव बहुत ही उत्साह से मनाया जाता है। दीपावली मनाने वाले देशों में फिजी, मरिशश, नेपाल, इंडोनेशिया, मलेशिया, श्रीलंका, कनाडा, सिंगापुर, इंग्लैण्ड आदि हैं।

आइये, आज दीपावली के इस पावन प्रकाश पर्व पर हम ज्ञान-भाईचारे के प्रकाश का प्रसार करें और अपने चारों ओर की अज्ञानता और वैमनस्यता रुपी अंधकार को दूर करें। आइये, अपनी संस्कृति और पारम्परिक मूल्यों को उजागर करें।

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