वाराणसी। मंगला गौरी व्रत सावन माह के प्रत्येक मंगलवार को माँ पार्वती (मंगला गौरी) को प्रसन्न करने और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है। यहाँ मंगला गौरी व्रत की संपूर्ण और सरल पूजा विधि दी गई है
आवश्यक सामग्री : मूर्ति/तस्वीर : माँ मंगला गौरी (पार्वती जी) और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र।
चौकी व वस्त्र : एक लकड़ी की चौकी, लाल या पीला कपड़ा।
कलश सामग्री : तांबे/मिट्टी का कलश, जल, आम के पत्ते, नारियल, रोली, अक्षत (चावल)।
श्रृंगार की वस्तुएं (16 की संख्या में) : मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, आलता, काजल, शीशा, कंघी, चुनरी आदि।
पूजा का सामान : दीपक (आटे या पीतल का), कपूर, धूप, फल, फूल (विशेषकर लाल फूल), माला।
प्रसाद : आटे की पंजीरी, लड्डू या घर में बनी कोई भी मिठाई।
16 की संख्या में सामग्री : 16 लौंग, 16 इलायची, 16 सुपारी, 16 जीरा, 16 धनिया, 16 फल, 16 फूल (माँ मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व होता है)।
मंगला गौरी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि :
सुबह के नियम और संकल्प
स्नान व संकल्प : सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ करें और हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें –
”हे मां मंगला गौरी, मैं अपने सुख, सौभाग्य और सुखी शादीशुदा जीवन के लिए आपका व्रत व पूजन कर रही/रहा हूं।”
चौकी की स्थापना : एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर माँ मंगला गौरी और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। चौकी पर थोड़ा चावल रखकर कलश स्थापना करें। कलश में जल भरें, आम के पत्ते लगाएं और ऊपर कलावा बंधा नारियल रखें।
1. पूजन प्रक्रिया :
गणेश पूजन : सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी का पूजन करें। उन्हें जल, रोली, अक्षत, दूर्वा और मोदक/मिठाई अर्पित करें।
2. मां मंगला गौरी का अभिषेक व श्रृंगार :
मां मंगला गौरी को जल से आचमन कराएं।
रोली, चंदन, कुमकुम और अक्षत लगाएं।
माँ को 16 श्रृंगार की सामग्री और लाल चुनरी अर्पित करें।
16 वस्तुओं का अर्पण : माँ को 16 की संख्या में फूल, लौंग, इलायची, सुपारी, फल और मेवे अर्पित करें।
दीपक प्रज्वलित करें : 16 बत्तियों वाला दीपक या फिर आटे का दीपक जलाएं।
3. कथा और आरती :
व्रत कथा : हाथ में थोड़ा सा चावल और फूल लेकर मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। कथा पूर्ण होने के बाद चावल माँ के चरणों में अर्पित कर दें।
आरती : कपूर या 16 बत्तियों वाले दीपक से माँ मंगला गौरी और गणेश जी की आरती करें।
4. भोग और पारण (व्रत खोलना) :
भोग : माँ को पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
दान : पूजा समाप्त होने के बाद श्रृंगार का सामान और 16 वस्तुएं किसी सुहागिन महिला या मंदिर के पुजारी को दान करें।
पारण : इस व्रत में केवल एक बार (शाम को) ही भोजन किया जाता है। भोजन में नमक का सेवन नहीं किया जाता है (फलाहार या बिना नमक का सात्विक भोजन ग्रहण करें)।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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