तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर ने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक नेतृत्व शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए ईकलाकार के साथ ‘रचनात्मक नेतृत्व’ नामक अंतःविषय पाठ्यक्रम के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। यह 30 घंटे का विशेष पाठ्यक्रम संस्थान के भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग के अंतर्गत संचालित होगा।
भारतीय परंपरागत प्रदर्शन कलाओं, ज्ञान-विज्ञान और उद्योग जगत के अनुभवी विशेषज्ञों के समन्वय से तैयार यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल पढ़ाएगा नहीं, बल्कि अनुभव कराएगा। दुर्लभ भारतीय कलाओं को शिक्षण का माध्यम बनाकर छात्रों में रचनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, भावनात्मक समझ और व्यावहारिक दक्षता का विकास किया जाएगा।
प्रारंभिक चरण में इसे ग्रीष्मकालीन कक्षा के रूप में आरंभ किया जाएगा, जिसके सफल क्रियान्वयन के बाद इसे नियमित शैक्षणिक ढांचे का हिस्सा बनाने की योजना है। यह पहल प्राचीन भारतीय ज्ञान को समकालीन नेतृत्व अभ्यास से जोड़ते हुए संस्थान की समग्र, मूल्यनिष्ठ और संस्कार पूर्ण शिक्षा की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है।

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने इस अवसर पर कहा कि
“नेतृत्व शिक्षा केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं हो सकती। रचनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्य इसके मूल आधार हैं। ईकलाकार के साथ यह साझेदारी भारतीय प्रदर्शन कलाओं से प्रेरणा लेकर विद्यार्थियों को संवेदनशील, नवाचारी और वैश्विक स्तर के नेतृत्व के लिए तैयार करेगी।”
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के इस संगम को शिक्षा जगत में एक दूरदर्शी और सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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