तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर की राजनीति में भाजपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए मेदिनीपुर संगठनात्मक जिले की कमान एक बार फिर सौमेन तिवारी को सौंपी है। पार्टी ने मौजूदा जिलाध्यक्ष शमित मंडल को पद से हटाकर तिवारी को नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है।
सौमेन तिवारी के लिए यह जिम्मेदारी नई नहीं है। वे पहले भी मेदिनीपुर संगठनात्मक जिले के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और फिलहाल प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी समिति के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं। ऐसे में उनकी वापसी को केवल पद परिवर्तन के बजाय संगठन में पूर्व अनुभव वाले नेतृत्व को फिर से आगे लाने के फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि संगठनात्मक फेरबदल फिलहाल मेदिनीपुर जिले तक ही सीमित रखा गया है। घाटाल और झाड़ग्राम संगठनात्मक जिलों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि प्रदेश नेतृत्व ने अलग-अलग संगठनात्मक जिलों की परिस्थितियों के आधार पर फिलहाल अलग रणनीति अपनाई है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मेदिनीपुर संगठनात्मक जिले में नेतृत्व के एक वर्ग के कामकाज को लेकर प्रदेश नेतृत्व पूरी तरह संतुष्ट नहीं था। संगठन के स्तर पर बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सूत्रों का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भी संगठन में बदलाव की इच्छा व्यक्त की गई थी। हालांकि, इस संबंध में संघ की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सौमेन तिवारी को संघ के करीबी नेताओं में माना जाता है। यही वजह है कि उनकी नियुक्ति को संगठन के भीतर समन्वय और सांगठनिक सक्रियता बढ़ाने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में नई टीम किस तरह काम करती है, यही इस बदलाव के प्रभाव का वास्तविक संकेत देगा।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद सौमेन तिवारी ने कहा, “जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मुझे दी गई है, उसे मैं पूरी निष्ठा के साथ निभाने का हर संभव प्रयास करूंगा।”
इसी के साथ भाजपा ने मेदिनीपुर विभाग के लिए शमित दास और बबलू बरम को प्रभारी/आह्वायक की जिम्मेदारी दी है। दोनों नेताओं को भी संघ के करीबी नेताओं के रूप में जाना जाता है। शमित दास पूर्व में भाजपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं।
इस तरह देखा जाए तो मेदिनीपुर में भाजपा ने एक साथ जिलाध्यक्ष और विभागीय स्तर पर जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। खास बात यह है कि नई व्यवस्था में ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, जिन्हें संगठन का पूर्व अनुभव है। इससे पार्टी के सामने तत्काल चुनौती संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय मजबूत करने की होगी।
मेदिनीपुर में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम मेदिनीपुर की राजनीति में विभिन्न दलों के बीच संगठनात्मक सक्रियता लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि इस फेरबदल का चुनावी असर क्या होगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भाजपा ने मेदिनीपुर संगठनात्मक जिले में नेतृत्व के स्तर पर बदलाव का निर्णय लिया है और इसकी जिम्मेदारी पार्टी के पुराने संगठनात्मक अनुभव वाले चेहरे को दी है।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

