मुंबई। भारत की स्वर कोकिला कही जाने वालीं लता मंगेशकर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा है। बदलते दौर, बदलती पीढ़ियों और बदलते संगीत के बावजूद लता जी की मधुर गायिकी ने हमेशा श्रोताओं के दिलों पर राज किया।
6 फरवरी को उनका निधन जरूर हुआ, लेकिन सात दशकों से भी अधिक लंबे करियर में उन्होंने जो विरासत छोड़ी, वह अमर है।
लता मंगेशकर ने अपने करियर में 38 से अधिक भाषाओं में गीत गाए और राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती दी। उनके योगदान को सम्मान देने के लिए उन्हें देश-विदेश से कई बड़े पुरस्कार और सम्मान मिले।

स्वर्ण युग की आवाज़
1950 से लेकर 1980 के दशक तक का समय लता मंगेशकर के करियर का स्वर्ण युग माना जाता है। इस दौर में उन्होंने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ क्षेत्रीय सिनेमा को भी ऐसी आवाज़ दी, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन गई। इसी कालखंड में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी पहचान बनाई।
लता मंगेशकर के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान
- गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (1974) सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली सिंगर के रूप में नाम दर्ज। यह उपलब्धि उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाली शुरुआती घटना थी।
- की ऑफ द सिटी ऑफ जॉर्जटाउन (1980) दक्षिण अमेरिका के गुयाना देश में जॉर्जटाउन शहर की चाबी से सम्मानित। 1980 में वहां हुई उनकी यात्रा के दौरान हजारों लोगों की भीड़ ने उनका स्वागत किया। उनकी दीवानगी देखकर शहर ने उन्हें यह सम्मान दिया।
- सूरीनाम गणराज्य की मानद नागरिकता (1980) दक्षिण अमेरिका के सुरिनाम देश ने उनके संगीत योगदान के लिए मानद नागरिकता प्रदान की। यह पुरस्कार भी उसी साल दिया गया था।
- एशिया दिवस (1985) कनाडा के टोरंटो में 9 फरवरी को “एशिया दिवस” घोषित किया गया, जो लता मंगेशकर के सम्मान में मनाया जाता है। यह उनके अंतरराष्ट्रीय संगीत योगदान और टोरंटो आगमन के लिए दिया गया सम्मान था।
- ऑफिसर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर (2007) फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान। लता मंगेशकर को भारत की सांस्कृतिक राजदूत के रूप में यह पुरस्कार मिला।
- IIFA लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2000) लंदन में अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी (IIFA) द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार। यह उनके वैश्विक संगीत प्रभाव को मान्यता देने वाला प्रमुख अवॉर्ड था।

जॉर्जटाउन की चाबी और सूरीनाम की नागरिकता
साल 1980 में दक्षिण अमेरिका के गुयाना स्थित जॉर्जटाउन शहर की ‘की ऑफ द सिटी’ लता मंगेशकर को भेंट की गई। जब वह जॉर्जटाउन पहुंचीं तो हजारों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया, जिससे वहां उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
इसी वर्ष उन्हें सूरीनाम गणराज्य की मानद नागरिकता से भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके अद्वितीय संगीत योगदान के लिए दिया गया था।
‘एशिया दिवस’ और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
साल 1985 में लता मंगेशकर के सम्मान में 9 दिवस को ‘एशिया दिवस’ घोषित किया गया। यह सम्मान उन्हें टोरंटो आगमन और अंतरराष्ट्रीय संगीत जगत में उनके अमूल्य योगदान के लिए दिया गया था, जिसे आज भी पूरे सम्मान के साथ मनाया जाता है।
लाइफटाइम अचीवमेंट और फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान
साल 2000 में लता मंगेशकर को लंदन में आईआईएफए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उन्हें फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑफिसर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ से भी नवाजा गया, जो उनके वैश्विक संगीत योगदान की पुष्टि करता है।
एक आवाज़, जो सदियों तक गूंजेगी
लता मंगेशकर सिर्फ़ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि वह भारत की सांस्कृतिक आत्मा की आवाज़ थीं। उनके गीत, उनकी साधना और उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेंगी।
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