कोलकाता | 21 सितंबर 2025 : पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में कुर्मी समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जा की मांग को लेकर चलाया जा रहा ‘रेल टेका डहर छेका’ आंदोलन हिंसक हो गया। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और बांकुड़ा जिलों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग घायल हुए और कुछ को हिरासत में लिया गया।
🔥 बंगाल में झड़प की घटनाएँ
- पुरुलिया के आद्रा स्टेशन और बांकुड़ा के बिष्णुपुर स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने रेल पटरियों पर बैठकर ट्रेनों को रोका
- पुलिस ने रेलवे एक्ट और धारा 144 के तहत कार्रवाई करते हुए लाठीचार्ज और गिरफ्तारी की
- प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना चेतावनी बल प्रयोग किया, जबकि प्रशासन ने कहा कि आंदोलनकारियों ने पथराव किया
आदिवासी कुर्मी समाज मंच के नेताओं ने कहा: उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को राज्यव्यापी बंद में बदला जाएगा
पुरुलिया के कुस्तौर, झालदा, कोटशिला और पुरुलिया रेलवे स्टेशनों पर रेल यातायात सामान्य है। विभिन्न स्टेशनों पर पर्याप्त पुलिस और आरपीएफ तैनात है। हालाँकि, आदिवासी कुर्मी समाज के मुख्य सलाहकार अजीत प्रसाद महतो को पुलिस ने देर रात कोटशिला इलाके से गिरफ्तार कर लिया, उनके बेटे विश्वजीत महतो ने दावा किया है।
🛤️ आंदोलन की पृष्ठभूमि
- कुर्मी समुदाय का दावा है कि उन्हें 1931 की जनगणना और ऐतिहासिक दस्तावेजों में आदिवासी माना गया था
- लेकिन 1950 के अनुसूचित जनजाति आदेश में उनका नाम छूट गया, जिसे वे ऐतिहासिक भूल मानते हैं
- आंदोलनकारियों की तीन प्रमुख मांगें:
- कुड़मी समुदाय को एसटी सूची में शामिल किया जाए
- कुर्माली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में मान्यता मिले
- सरना धर्म कोड को लागू किया जाए
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