कोलकाता हिन्दी न्यूज | 21 अगस्त 2026: कुम्हारटोली के घाट के सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण का काम पहले ही शुरू हो चुका है। पूजा से पहले नए रूप में घाट के उद्घाटन की योजना है।
अब उत्तर कोलकाता की ऐतिहासिक कुम्हारटोली की पुतुलपाड़ा का भी कायाकल्प करने की तैयारी शुरू हो गई है। बुनियादी सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ कुम्हारटोली को केंद्र बनाकर पर्यटन की नई रूपरेखा तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल की है।
राज्य की मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती कुम्हारटोली पहुंचीं और वहां के मूर्तिकारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में जानकारी ली।
इस दौरान नवान्न के अधिकारी भी मौजूद थे। मंत्री ने मूर्तिकारों के संगठन से इलाके के विकास के लिए जरूरी योजनाओं का प्रस्ताव लिखित रूप में देने को कहा।
पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है कुम्हारटोली
कुम्हारटोली लंबे समय से देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के कलाकारों द्वारा बनाई जाने वाली दुर्गा प्रतिमाओं समेत विभिन्न मूर्तियां देश की सीमाओं को पार कर विदेशों तक पहुंचती हैं।
इसके बावजूद यहां काम करने वाले अधिकांश कलाकारों की जीवनशैली में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। कलाकारों का कहना है कि दुनिया भर में उनकी कला की पहचान है, लेकिन काम करने की जगह और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अब भी बेहतर नहीं है।
स्टूडियो और बेहतर सुविधाओं की योजना
राज्य सरकार कुम्हारटोली के समग्र विकास के लिए एक मास्टरप्लान तैयार करने पर विचार कर रही है। इसके तहत कलाकारों के लिए पक्की छत, बेहतर स्टूडियो और कला महाविद्यालय जैसी सुविधाएं विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।
हालांकि, विकास की योजना कलाकारों और स्थानीय लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही तैयार की जाएगी। नवान्न के अधिकारियों का कहना है कि कुम्हारटोली को दुनिया के सामने नए रूप में पेश करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
करीब 250-300 मूर्तिकार करते हैं काम
कुम्हारटोली में करीब 250 से 300 मूर्तिकार काम करते हैं। बरसात के मौसम में यहां की स्थिति और खराब हो जाती है। कई हिस्सों में कीचड़ और पानी जमा होने के कारण आवाजाही मुश्किल हो जाती है। अधिकांश कार्यक्षेत्र टीन, बांस और प्लास्टिक की अस्थायी संरचनाओं से ढके हुए हैं।
विडंबना यह है कि इसी जगह पर प्रतिमाएं देखने और कलाकारों की कला को करीब से समझने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी
सरकार की योजना कुम्हारटोली को सिर्फ प्रतिमा निर्माण के लिए प्रसिद्ध इलाके तक सीमित रखने की नहीं है। इसे बंगाल की कला और संस्कृति से जुड़े प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
कलाकारों का कहना है कि लोग सिर्फ प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए कुम्हारटोली नहीं आते, बल्कि यहां की कला और प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
यदि इलाके का वातावरण और बुनियादी सुविधाएं बेहतर हों तो कुम्हारटोली देश-विदेश के पर्यटकों के लिए और बड़ा आकर्षण बन सकता है।
प्रतिमा बनाने के लिए पक्की जमीन हमेशा उपयुक्त नहीं
हालांकि, विकास योजनाओं में कलाकारों की व्यावहारिक जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। मूर्तिकारों के मुताबिक प्रतिमा निर्माण के लिए हर जगह कंक्रीट की पक्की जमीन उपयुक्त नहीं होती। खुले स्थान, पर्याप्त धूप, रोशनी और हवा प्रतिमा बनाने के काम के लिए अधिक उपयोगी होते हैं।
कुम्हारटोली प्रगतिशील मृत्तिका शिल्पी एवं साज शिल्पी समिति के सचिव अपूर्व पाल ने कहा कि सरकार ने कलाकारों से पूछा है कि इलाके के विकास के लिए उनकी क्या जरूरतें हैं। कलाकार आपस में चर्चा करने के बाद अपनी मांगें और सुझाव सरकार को सौंपेंगे।
घाट के बाद अब पुतुलपाड़ा के विकास पर नजर
कुम्हारटोली घाट के पुनर्विकास का काम पहले ही शुरू हो चुका है और पूजा से पहले इसके नए रूप में उद्घाटन की योजना है। अब पुतुलपाड़ा के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की पहल से स्थानीय कलाकारों को भी उम्मीद जगी है।
अगर प्रस्तावित योजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो कुम्हारटोली न सिर्फ मूर्तिकला का प्रमुख केंद्र बना रहेगा, बल्कि कोलकाता के प्रमुख कला और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में भी शामिल हो सकता है।
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