कोलकाता हिन्दी न्यूज | 02 सितम्बर 2026: कोलकाता की ऐतिहासिक ट्राम सेवा को फिर से आधुनिक रूप में शहर की सड़कों पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। इसी दिशा में मंगलवार को परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
बैठक में कोलकाता के परिवहन ढांचे के आधुनिकीकरण, ट्राम सेवा की वापसी और शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
मंगलवार को परिवहन भवन में ऑस्ट्रेलिया के कोलकाता स्थित कौंसुल जनरल बर्नार्ड लिंच ने परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह से मुलाकात की।
इस दौरान दोनों पक्षों के बीच पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने में संभावित सहयोग को लेकर विचार-विमर्श हुआ।
ट्राम सेवा बहाल करने की तैयारी
बैठक में परिवहन मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार कोलकाता में ट्राम सेवा को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए केंद्रीय सरकारी संस्था RITES को सर्वे का जिम्मा दिया गया है।
सर्वे के माध्यम से यह अध्ययन किया जा रहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में ट्राम सेवा को किस तरह अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और प्रभावी बनाया जा सकता है।
सरकार की योजना केवल ट्राम सेवा को दोबारा शुरू करने तक सीमित नहीं है। ट्राम के परिचालन क्षेत्र का विस्तार करने और इसे शहर की मौजूदा परिवहन व्यवस्था के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
ट्राम को कोलकाता की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है। ऐसे में इसकी वापसी को लेकर परिवहन विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया के परिवहन मॉडल से सीखने की कोशिश
परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान वहां की परिवहन व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं का जायजा ले चुके हैं। बैठक में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में अपनाए जा रहे सफल प्रयोगों और तकनीकों का पश्चिम बंगाल में उपयोग किए जाने की संभावनाओं में रुचि दिखाई।
ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों की ओर से भी कोलकाता के परिवहन ढांचे के आधुनिकीकरण में सहयोग की इच्छा व्यक्त की गई। बैठक में ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों की संभावित भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई।
मंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को परिवहन विभाग की विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े टेंडर में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही। हालांकि, इसके लिए सरकारी नियमों और निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
ट्राम का दायरा बढ़ाने पर भी विचार
कोलकाता में ट्राम सेवा की वापसी के साथ-साथ इसके परिचालन क्षेत्र को बढ़ाने की संभावना भी तलाशी जा रही है। इसके लिए RITES द्वारा किए जा रहे सर्वे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सर्वे में यह देखा जा रहा है कि किन मार्गों पर ट्राम सेवा को दोबारा शुरू किया जा सकता है और किन क्षेत्रों में इसे आधुनिक परिवहन व्यवस्था के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है। ट्राम के बुनियादी ढांचे, परिचालन और भविष्य की उपयोगिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं का भी अध्ययन किया जा रहा है।
अगर योजना आगे बढ़ती है तो भविष्य में कोलकाता में ट्राम को केवल ऐतिहासिक विरासत के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन विकल्प के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल भी रहा मौजूद
परिवहन मंत्री के साथ हुई बैठक में ऑस्ट्रेलिया के कौंसुल जनरल बर्नार्ड लिंच के अलावा वरिष्ठ आर्थिक अनुसंधान एवं विजिट्स अधिकारी अनाघा, कॉरपोरेट सर्विसेज मैनेजर राजीव घोष और वरिष्ठ रिसर्च एवं विजिट्स अधिकारी एंजेलिना नायर भी मौजूद थीं।
बैठक के दौरान कोलकाता के परिवहन ढांचे के आधुनिकीकरण में ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों की भूमिका और संभावित निवेश एवं तकनीकी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत हुई।
मेलबर्न की ट्राम व्यवस्था का भी हुआ जिक्र
ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न शहर अपनी विस्तृत ट्राम व्यवस्था के लिए जाना जाता है। वहां ट्राम सार्वजनिक परिवहन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोलकाता और मेलबर्न के बीच ट्राम को लेकर पहले से ही एक खास सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है।
ट्राम प्रेमी संगठनों की पहल पर दोनों शहरों के बीच कई बार ‘कोलकाता-मेलबर्न ट्राम यात्रा’ जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं। मेलबर्न से ट्राम प्रेमियों का कोलकाता आना और यहां की ऐतिहासिक ट्राम व्यवस्था को देखना भी इस रिश्ते को मजबूत करता रहा है।
ऐसे में अगर ऑस्ट्रेलिया की तकनीकी विशेषज्ञता और कोलकाता की ऐतिहासिक ट्राम विरासत का मेल होता है, तो शहर में ट्राम सेवा के लिए एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।
विरासत के साथ आधुनिकता का मेल
कोलकाता की ट्राम सेवा सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि शहर की पहचान और विरासत का भी हिस्सा रही है। बदलते समय के साथ ट्राम सेवा को आधुनिक बनाना एक बड़ी चुनौती है।
हालांकि, सरकार की ओर से RITES के माध्यम से कराया जा रहा सर्वे और ऑस्ट्रेलिया के साथ संभावित सहयोग इस दिशा में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आधुनिक तकनीक, बेहतर बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सहारे कोलकाता की ऐतिहासिक ट्राम फिर से शहर की सड़कों पर अपनी पुरानी रफ्तार हासिल कर पाएगी?
आने वाले दिनों में RITES की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम से तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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