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कोलकाता की आइकॉनिक ट्राम को बचाने की मुहिम, ट्रामजात्रा ने 2026 कैलेंडर किया लॉन्च

  • प्रदूषण के बढ़ते संकट में इको-फ्रेंडली ट्राम की जोरदार अपील

कोलकाता, 20 दिसंबर 2025 : कोलकाता की सड़कों की शान, 150 साल से ज्यादा पुरानी ट्राम अब विलुप्ति के कगार पर खड़ी है। शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, ऐसे में ट्राम प्रेमी इसे बचाने के लिए नई मुहिम चला रहे हैं।

ट्रामजात्रा ग्रुप ने 2026 का विशेष कैलेंडर जारी किया है, जो सिर्फ तारीखें बताने वाला नहीं बल्कि ट्राम को बचाने की लड़ाई का प्रतीक है। ये कैलेंडर ट्राम को जीरो एमिशन वाला पर्यावरण-अनुकूल ट्रांसपोर्ट बताकर लोगों को जागरूक कर रहा है।

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2026 कैलेंडर की प्रमुख विशेषताएं

दो फॉर्मेट उपलब्ध: वॉल कैलेंडर और डेस्क कैलेंडर दोनों।

  • दुर्लभ तस्वीरें: सालों भर की ट्राम फोटोज, जिनमें रोबर्टो डी’एंड्रिया और अन्य ने ली गई इमेजेस शामिल। पिछले साल की तरह 1960s की कलर फोटोज भी।
  • प्रो-ट्राम डिजाइन: ‘कैलेंडर आर्ट’ स्टाइल में बनाया गया, ताकि लोगों में ट्राम के प्रति मोहब्बत जगे।
  • फंडिंग का उद्देश्य: कैलेंडर की बिक्री से मिलने वाली पूरी रकम ट्राम बचाओ अभियान और संबंधित गतिविधियों पर खर्च होगी।
  • डिजाइनर: फाइनेंशियल एनालिस्ट अनुराग मित्रा ने डिजाइन किया, जिसमें रोबर्टो डी’एंड्रिया का नोट भी शामिल।
  • न्यू ईयर से पहले रिलीज, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे खरीदकर अभियान में योगदान दें।

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ट्रामजात्रा ग्रुप की कहानी

  • शुरुआत: 1996 में मेलबर्न और कोलकाता के ट्राम उत्साहियों ने मिलकर शुरू किया।
  • मुख्य लोग: रोबर्टो डी’एंड्रिया (मेलबर्न के पूर्व ट्राम ड्राइवर-कंडक्टर) और फिल्ममेकर महादेव शी (ट्रामजात्रा के को-फाउंडर)।
  • उद्देश्य: ‘मूविंग ट्राम कार्निवल’ के रूप में ट्राम को हेरिटेज, पर्यावरण-अनुकूल और ग्रीन मोबिलिटी के रूप में प्रमोट करना।
  • कलकत्ता ट्राम यूजर्स एसोसिएशन (CTUA) के साथ मिलकर प्रदर्शन, राइड्स और इवेंट्स आयोजित करता है।
  • पिछले इवेंट्स में सुंदरबन थीम, क्लाइमेट चेंज और हेरिटेज पर फोकस।

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ट्राम की मौजूदा स्थिति और क्यों बचानी चाहिए?

  • इतिहास: 1873 में शुरू हुई कोलकाता ट्राम एशिया की सबसे पुरानी इलेक्ट्रिक ट्राम नेटवर्क है (1902 से इलेक्ट्रिक)।
  • वर्तमान: कभी 37 रूट्स थे, अब सिर्फ 2 रूट बचे हैं। पश्चिम बंगाल सरकार इसे बंद करने की ओर बढ़ रही है, ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने इसका विरोध किया है।
  • पर्यावरण लाभ: पूरी तरह जीरो पॉल्यूशन – ओवरहेड वायर से बिजली लेती है, कोई बैटरी वेस्ट नहीं।
  • शहर के लिए जरूरी: बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम में ट्राम सस्टेनेबल और सस्ता विकल्प। यह कोलकाता की पहचान और हेरिटेज का हिस्सा है।

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CTUA और ट्रामजात्रा जैसे ग्रुप्स सड़कों पर उतरकर विरोध और जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

ट्राम सिर्फ एक सवारी नहीं, कोलकाता की धड़कन है! इस मुहिम में शामिल हों – कैलेंडर खरीदें, अभियान को सपोर्ट करें और ट्राम राइड लें। आप ट्राम बचाने के लिए क्या करेंगे?

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