कोलकाता हिन्दी न्यूज | 03 अगस्त 2026: प्रतिबंधित चीनी मोबाइल ऐप के भारतीय संस्करण का इस्तेमाल कर देशभर में चल रहे एक बड़े सेक्सटॉर्शन (Sextortion) रैकेट का खुलासा हुआ है। पूर्वी कोलकाता के मानिकतला थाना पुलिस ने इस मामले में एयर होस्टेस कोर्स की एक मेधावी छात्रा को गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि उसने सोशल मीडिया और वीडियो चैट के जरिए एक युवक को जाल में फंसाकर उससे 1 लाख 47 हजार रुपये की उगाही की।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार युवती उत्तर 24 परगना के एक प्रतिष्ठित स्कूल और कॉलेज की छात्रा रही है। स्नातक के बाद वह एयर होस्टेस प्रशिक्षण ले रही थी। इसी दौरान उसकी सोशल मीडिया पर चंडीगढ़ की एक युवती से पहचान हुई, जिसने उसे प्रतिबंधित चीनी ऐप के भारतीय संस्करण से जुड़े एक अंतरराज्यीय सेक्सटॉर्शन नेटवर्क में एजेंट के रूप में शामिल कराया।
ऐसे काम करता था सेक्सटॉर्शन गिरोह
जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने प्रतिबंधित चीनी ऐप का भारतीय संस्करण तैयार किया था। इसमें सदस्य बनने के लिए शुल्क देना पड़ता था। इसके बाद एजेंट सोशल मीडिया और ऐप के माध्यम से लोगों से दोस्ती करते थे।
- महिला एजेंट युवकों को निशाना बनाती थीं।
- पुरुष एजेंट महिलाओं को अपने जाल में फंसाते थे।
- पहले सामान्य बातचीत होती थी, फिर वीडियो कॉल और उसके बाद अश्लील वीडियो चैट।
- पूरी वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग की जाती थी।
- बाद में वीडियो वायरल करने की धमकी देकर मोटी रकम वसूली जाती थी।
‘अनु’ बनकर युवक को फंसाया
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार छात्रा ने पीड़ित युवक से ऐप के माध्यम से संपर्क किया और अपना नाम “अनु” बताया। पहले सामान्य बातचीत हुई, फिर वीडियो कॉल शुरू हुई।
आरोप है कि वीडियो कॉल के दौरान रिकॉर्डिंग कर ली गई और बाद में उसी वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर युवक से 1.47 लाख रुपये वसूल लिए गए।
इतना ही नहीं, रकम मिलने के बाद भी आरोपी लगातार और पैसे की मांग करती रही। परेशान होकर पीड़ित युवक ने मानिकतला थाने में शिकायत दर्ज कराई।
तकनीकी जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने साइबर जांच शुरू की। आरोपी युवती अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करती थी।
हालांकि, तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसकी पहचान कर उसे उत्तर शहरतली स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।
पूरे नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में पश्चिम बंगाल और देश के अन्य राज्यों में कितने एजेंट सक्रिय हैं। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि प्रतिबंधित चीनी ऐप का भारतीय संस्करण किसने विकसित किया और इसके पीछे कौन-सा संगठित साइबर नेटवर्क काम कर रहा है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सोशल मीडिया और वीडियो कॉल के जरिए होने वाली ब्लैकमेलिंग तेजी से बढ़ रही है। लोगों को अजनबियों से ऑनलाइन संपर्क करते समय अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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