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अब बिना टांके के होगा हार्ट वाल्व प्रत्यारोपण: PG में पहली बार महिला के हृदय में लगाया गया स्यूचरलेस टिशू वाल्व

कोलकाता न्यूज़ डेस्क | 24 फरवरी 2026: कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल (पीजी) में पूर्वी भारत में पहली बार बिना टांके (स्यूचरलेस) टिशू हार्ट वाल्व का सफल प्रत्यारोपण किया गया है।

यह ऑपरेशन 39 वर्षीय महिला मरीज पर किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने इसे क्षेत्र में दुर्लभ उपलब्धि बताया है।

कार्डियो थोरेसिक टीम ने की सर्जरी

सर्जरी कार्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जन प्रोफेसर डॉ. शांतनु दत्ता के नेतृत्व में गुरुवार को की गई।

टीम में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिल्पा बसु राय, डॉ. देवतनु हाजरा, डॉ. अपर्णा, डॉ. देवर्पित मुखर्जी, डॉ. उज्जैनी घोषाल और डॉ. विक्रमजीत साहा शामिल थे।

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एनेस्थीसिया टीम में प्रोफेसर डॉ. चैताली दासगुप्ता, डॉ. काकली घोष, डॉ. सौरभ दास, डॉ. अनमोल सिंह और डॉ. रुश्ना शर्मा थे।

सर्जरी के प्रमुख फायदे

डॉ. दत्ता ने बताया कि स्यूचरलेस टिशू वाल्व में टांके लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे ऑपरेशन समय कम लगता है और छाती पर छोटा चीरा लगता है। जोखिम कम रहता है।

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यह तकनीक बुजुर्गों और कमजोर हृदय वाले मरीजों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। टिशू वाल्व की कीमत लगभग 4.5 लाख रुपये है।

निजी अस्पतालों में यह सर्जरी 7-8 लाख रुपये तक आ सकती है, जबकि पीजी में यह पूरी तरह नि:शुल्क की गई।

मरीज की स्थिति सामान्य

डॉ. शिल्पा बसु राय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य साथी बीमा योजना से मरीज को एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा।

डॉक्टरों ने बताया कि यदि भविष्य में वाल्व में समस्या आती है तो ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) से इसे बदला जा सकता है।

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वाल्व के फायदे

  • संक्रमण का खतरा कम रहता है।
  • हार्ट-लंग बाईपास मशीन पर निर्भरता का समय कम होता है।
  • सर्जरी के बाद जीवनशैली में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं।
  • किसी भी उम्र के मरीज में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
  • मरीज सामान्य रूप से मां बन सकती है।
  • एक बार लगने के बाद 15-20 वर्षों तक खराब होने की आशंका कम रहती है।
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यह सर्जरी पूर्वी भारत में चिकित्सा क्षेत्र की उन्नति का उदाहरण है।

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