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कोलकाता मेट्रो — ब्लू लाइन पर हाई-टेक सुरक्षा: 1,678 कैमरा करेगी निगरानी

कोलकाता हिन्दी न्यूज़ | सिटी डेस्क : देश की सबसे पुरानी मेट्रो लाइन — कोलकाता की ब्लू लाइन (नोर्थ-साउथ कॉरिडोर) — अब सुरक्षा के मामले में एक नया दौर देखने को तैयार है। मेट्रो रेलवे प्रशासन ने 1,678 हाई-टेक CCTV कैमरों की स्थापना की प्रक्रिया को तेज कर दिया है, जो AI-पावर्ड सिस्टम से लैस होंगे।

ये कैमरे सीधे रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) के कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर सेकंडों में रियल-टाइम अलर्ट भेजेंगे। यह अपग्रेड यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ चोरी, तोड़फोड़ और प्लेटफॉर्म पर भीड़भाड़ जैसी समस्याओं पर नकेल कसने का वादा करता है।

प्रोजेक्ट की झलक: क्या है खास?

यह ‘IP-बेस्ड CCTV सर्विलांस सिस्टम अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट’ 19 जून 2025 को लॉन्च हुआ था, जिसकी लागत 25.34 करोड़ रुपये है। नौ महीनों में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट मार्च 2026 तक चालू हो जाएगा।

कुल 1,678 कैमरों में से 1,625 स्टेशनों और प्लेटफॉर्म्स पर लगेंगे, जबकि 53 RPF थानों पर। ये कैमरे फुल HD और 4K UHD रेजोल्यूशन वाले होंगे, जो मेट्रो भवन में 240 TB सेंट्रलाइज्ड स्टोरेज से जुड़ेंगे। डेटा कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रहेगा।

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विशेषता विवरण
कुल कैमरे 1,678 (1,625 स्टेशनों/प्लेटफॉर्म्स पर, 53 RPF थानों पर)
टेक्नोलॉजी AI-पावर्ड बिहेवियरल एनालिटिक्स, इंटेलिजेंट फेशियल रिकग्निशन
अलर्ट सिस्टम अनअटेंडेड बैगेज, पेरिमीटर ब्रेक, असामान्य भीड़ या संदिग्ध मूवमेंट पर रियल-टाइम अलर्ट
लागत और समय ₹25.34 करोड़, 9 महीने (मार्च 2026 तक पूरा)
अतिरिक्त फायदे क्राउड हीट मैप्स, पीक-आवर कंजेशन एनालिसिस, स्टाफ डिप्लॉयमेंट में मदद

स्रोत: मेट्रो रेलवे आधिकारिक अपडेट, दिसंबर 2025।

खतरे को पहले कैसे पकड़ेगा सिस्टम?

पुराने एनालॉग सिस्टम को रिप्लेस करने वाले इस नेटवर्क में AI इंजन ‘डिसोरिएंटेड’ या संदिग्ध बॉडी मूवमेंट्स — जैसे प्लेटफॉर्म एज पर हिचकिचाहट, तेज चाल या एरेटिक जेस्चर — को पहचानेगा।

एक अधिकारी ने बताया: “यह सिस्टम पैसिव मॉनिटरिंग से आगे है। सेकंडों में RPF को अलर्ट भेजकर प्रतिक्रिया समय सुधारेंगे और जानें बचाएंगे।”

यह अपग्रेड न केवल सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि ऑपरेशनल डेटा जैसे क्राउड फ्लो हीट मैप्स और प्लेटफॉर्म ड्वेल-टाइम एनालिसिस से ट्रेन शेड्यूल और स्टाफ तैनाती को बेहतर बनाएगा।

प्रतीकात्मक फोटो, साभार गूगल

‘यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता’

पी.एस. पापोलू, जनरल मैनेजर, मेट्रो रेलवे कोलकाता: “ब्लू लाइन पर रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं। यह AI-पावर्ड सिस्टम खतरे की पूर्वानुमान करने में मदद करेगा। हमारी प्राथमिकता पैसेंजर सेफ्टी है, और यह प्रोजेक्ट पूर्वी भारत का सबसे बड़ा सर्विलांस अपग्रेड है।”

आर.के. महापात्र, सीनियर डीसीएम, सेफ्टी ब्रांच: “पुराने सिस्टम से अपग्रेड के बाद, हम चोरी, वेंडलिज्म और प्लेटफॉर्म ओवरक्राउडिंग जैसी घटनाओं पर काबू पा सकेंगे। RPF को रियल-टाइम डेटा मिलेगा, जो रिस्पॉन्स टाइम को मिनटों से सेकंड्स में बदल देगा।”

यात्रियों की प्रतिक्रिया:

राहुल दास (32 वर्ष), आईटी प्रोफेशनल, ईस्प्लेनेड स्टेशन: “ब्लू लाइन पर भीड़ में चोरी की शिकायतें सुनते हैं। ये AI कैमरे अगर बैग छोड़ने या संदिग्ध हरकत पर अलर्ट करेंगे, तो मन में डर कम होगा। अच्छी पहल है।”

प्रिया बनर्जी (45 वर्ष), गृहिणी, पार्क स्ट्रीट: “मेट्रो में महिलाओं के लिए सुरक्षा हमेशा चिंता रहती है। फेशियल रिकग्निशन से अगर कोई खतरा पहले ही पकड़ लिया जाए, तो बहुत राहत मिलेगी। उम्मीद है जल्द चालू हो।”

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निष्कर्ष: सुरक्षा का नया दौर

1984 से कोलकाता की पहचान रही मेट्रो अब AI और हाई-टेक सर्विलांस के साथ और मजबूत बनने जा रही है। यह प्रोजेक्ट न केवल ब्लू लाइन को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में अन्य कॉरिडॉर्स के लिए भी एक मॉडल अपग्रेड साबित होगा।

क्या आप ब्लू लाइन के यात्री हैं? अपनी राय कमेंट में शेयर करें — क्या ऐसी तकनीक आपकी यात्रा बदल देगी?

(कोलकाता हिन्दी न्यूज़, शहरी परिवहन डेस्क; स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, डेवडिस्कोर्स, मेट्रो रेल टुडे)

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