कोलकाता हिन्दी न्यूज | 01 सितम्बर 2026: नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव होने की संभावना के बीच वामपंथी दलों ने मतदाता सूची को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है।
योग्य नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की मांग को लेकर सीपीएम समेत वामपंथी दल मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय का घेराव करने का कार्यक्रम बना रहे हैं।
हालांकि, इस आंदोलन की तारीख अभी तय नहीं हुई है। वाम दलों के सूत्रों के अनुसार, आपसी चर्चा के बाद कार्यक्रम की अंतिम तारीख और रणनीति तय की जाएगी।
करीब 29 लाख लोगों के नाम पर अभी भी फैसला बाकी
वाम दलों का यह आंदोलन 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने के मुद्दे पर केंद्रित है।
वाम दलों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 29 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हट गए, जिनका भविष्य फिलहाल ट्रिब्यूनल के स्तर पर लंबित है। वहीं, करीब 7.5 लाख लोगों ने मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है।
वामपंथी दलों का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आम लोगों के मताधिकार पर असर पड़ा है। उनका दावा है कि बिना पर्याप्त तैयारी के और यांत्रिक तरीके से मतदाता सूची में बदलाव किया गया।
इसी मुद्दे को लेकर अब वाम मोर्चा सीधे चुनावी अधिकारियों से जवाबदेही की मांग करने की तैयारी में है।
नगर निगम चुनाव से पहले आंदोलन की तैयारी
वाम दलों की इस सक्रियता को आगामी स्थानीय निकाय चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव में लंबे समय बाद वामपंथी दलों ने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए खाता खोलने में सफलता हासिल की है।
राजनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग का मानना है कि अब वामपंथी दल कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव में भी अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में मतदाता सूची का मुद्दा उनके लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक और संगठनात्मक अभियान बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा मतदाता सूची का मुद्दा
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और उन्हें दोबारा शामिल कराने से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से दिए गए आंकड़ों को लेकर भी चर्चा हुई।
अदालत में पेश जानकारी के अनुसार, दस्तावेज और प्रमाण के साथ आवेदन करने वाले बड़ी संख्या में लोगों को मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा शामिल कराने में सफलता मिली है।
इसी पृष्ठभूमि में मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटारा किए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
नाम हटाने के लिए हुआ था अभियान
चुनाव आयोग की ओर से देशभर में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। इसका उद्देश्य मृत व्यक्तियों और स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाकर मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना था।
हालांकि, पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हुए हैं।
वाम दल अब इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में रहना और उसके मताधिकार की रक्षा होना जरूरी है।
आंदोलन की तारीख पर जल्द फैसला
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के घेराव की तारीख फिलहाल घोषित नहीं की गई है। वामपंथी दल आपस में चर्चा के बाद कार्यक्रम तय करेंगे।
आने वाले दिनों में यदि आंदोलन की तारीख घोषित होती है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मतदाता सूची के मुद्दे पर वाम दलों को कितना राजनीतिक समर्थन मिलता है और आगामी कोलकाता-हावड़ा नगर निगम चुनाव से पहले यह मुद्दा किस तरह राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता है।
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