कोलकाता न्यूज डेस्क | 08 जून 2026: नगर निगम भर्ती घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री सुजीत बोस को सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर शीघ्र सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया और स्पष्ट कर दिया कि मामले की सुनवाई नियमानुसार जुलाई में ही होगी।
हाईकोर्ट के इस रुख को पूर्व मंत्री के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह गिरफ्तारी के बाद न्यायिक राहत पाने की कोशिश कर रहे थे।
क्या है पूरा मामला?
नगर निगम भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है। इसी जांच के तहत 11 मई को सुजीत बोस को गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया कि उन्हें किन विशिष्ट कारणों और साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया गया, यह स्पष्ट नहीं किया गया। इसी आधार पर उनकी ओर से गिरफ्तारी को चुनौती दी गई।
अदालत में क्या हुई सुनवाई?
सोमवार को सुजीत बोस के वकील ने न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अदालत में मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। उनका तर्क था कि गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिका पहले से लंबित है और इसे शीघ्र सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
हालांकि अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने पूछा कि यदि गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, तो अब इतनी जल्दबाजी में सुनवाई की आवश्यकता क्यों है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि गिरफ्तारी को लेकर आपत्ति है तो जमानत याचिका दाखिल करने का विकल्प क्यों नहीं अपनाया गया।
जुलाई में होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश जरूर दिया, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि इस पर सुनवाई जुलाई में होगी। अदालत ने कहा कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप की कोई विशेष आवश्यकता फिलहाल दिखाई नहीं देती।
इस आदेश के बाद सुजीत बोस को फिलहाल कानूनी मोर्चे पर इंतजार करना होगा।
राजनीतिक और कानूनी महत्व
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद विभिन्न कथित भ्रष्टाचार मामलों की जांच तेज हुई है। नगर निगम भर्ती घोटाला भी उन मामलों में शामिल है, जिन पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश केवल प्रक्रिया संबंधी है और इससे मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं मानी जानी चाहिए। गिरफ्तारी की वैधता, जांच की दिशा और संभावित राहत जैसे मुद्दों पर अंतिम निर्णय आगामी सुनवाई में ही सामने आएगा।
आगे क्या?
अब सभी की नजर जुलाई में होने वाली सुनवाई पर रहेगी। यदि अदालत याचिका स्वीकार कर विस्तृत सुनवाई करती है तो गिरफ्तारी की प्रक्रिया, जांच एजेंसी की कार्रवाई और आरोपी पक्ष के तर्कों पर विस्तार से विचार किया जा सकता है।
फिलहाल पूर्व मंत्री को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है और ईडी की कार्रवाई यथावत बनी हुई है।
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