कोलकाता डेस्क | 03 दिसंबर, 2025 : पिछले दो महीनों में कोलकाता फ़्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन (Kolkata FIR) में GPS स्पूफिंग और GNSS सिग्नल इन्ट्रूज़न के 100 से अधिक मामले सामने आए हैं। इस अभूतपूर्व वृद्धि ने भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बड़े साइबर खतरे की ओर संकेत किया है।
पायलटों के अनुसार, लगभग 2–3 उड़ानों को रोज़ रूट से विचलन (route deviation) या इमरजेंसी नेविगेशन तकनीक अपनानी पड़ी है। यह स्थिति न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट की साइबर-सुरक्षा के लिए भी चेतावनी मानी जा रही है।
📌 क्या है GPS स्पूफिंग?
GPS स्पूफिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई बाहरी तत्व झूठा नेविगेशन सिग्नल भेजकर विमान के वास्तविक GPS सिग्नल को बाधित या भ्रमित कर देता है। इससे —

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विमान की लोकेशन गलत दिख सकती है
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ऑटोपायलट गलत दिशा पकड़ सकता है
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पायलट को मैनुअल नियंत्रण लेना पड़ सकता है
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हवाई मार्गों के बीच टकराव जोखिम बढ़ता है
🔴 कोलकाता FIR क्यों बना हॉटस्पॉट?
एविएशन सूत्रों के अनुसार—
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मध्य-पूर्व से भारत की ओर आने वाली लंबी दूरी की उड़ानों में सिग्नल इन्ट्रूज़न लगातार बढ़ रहा है।
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कई विमानों में “GPS LOST”, “NAV UNRELIABLE” जैसे अलर्ट बार-बार ट्रिगर हो रहे हैं।
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कोलकाता FIR के खास हिस्सों में इन घटनाओं की आवृत्ति सबसे ज्यादा दर्ज की गई है।
🛫 पायलटों की प्रतिक्रिया:
पायलटों ने बताया कि स्पूफिंग के दौरान—
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फ्लाइट कंप्यूटर अचानक गलत पोज़िशन दिखाता है
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विमान की ट्रैकिंग लाइन ‘जंप’ कर जाती है
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ATC (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) को तुरंत सूचना देनी पड़ती है
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पायलटों को पुराने पारंपरिक नेविगेशन मोड पर स्विच करना पड़ता है
एक वरिष्ठ पायलट ने कहा— “GPS अचानक गायब हो जाता है। यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि बाहरी हस्तक्षेप होता है।”
🛡 DGCA और AAI की कार्रवाई
भारत के उड्डयन नियामक DGCA और AAI (Airports Authority of India) ने—
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एयरलाइंस को अलर्ट जारी किया
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सभी पायलटों को ट्रांसओशैनिक नेविगेशन मोड तैयार रखने के निर्देश दिए
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ATC को संवेदनशील रूट्स पर अधिक सतर्क किया
हालाँकि, अभी तक इन हमलों की स्रोत-पहचान नहीं हो पाई है।
⚠️ यात्रियों के लिए खतरा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि— आधुनिक विमान कई बैकअप नेविगेशन तकनीकों से लैस होते हैं। इसलिए दुर्घटना की संभावना बेहद कम होती है लेकिन बार-बार घटनाएँ बढ़ने से एयर ट्रैफिक की सुरक्षा, समयबद्धता और सिस्टम की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
🛰 क्या यह साइबर वॉरफेयर की झलक है?
वैज्ञानिकों का मत है कि GPS स्पूफिंग अक्सर—सैन्य गतिविधियों, भू-राजनीतिक तनाव, विद्युत-चुंबकीय हस्तक्षेप के समय देखा जाता है। भारत के नागरिक उड्डयन में यह स्तर पहली बार दर्ज किया जा रहा है।
📝 निष्कर्ष
कोलकाता FIR में बढ़ती GPS स्पूफिंग घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि एविएशन साइबर-सुरक्षा को अब सिर्फ तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा समझना होगा। एयरलाइंस, AAI और DGCA की संयुक्त रणनीति आगामी महीनों में निर्णायक होगी।
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