कोलकाता हिन्दी न्यूज | 04 अक्टूबर 2026: दुर्गापूजा से पहले कोलकाता में राजनीतिक पोस्टर को लेकर नया विवाद सामने आया है।
कामारडांगा इलाके की 107 साल पुरानी दुर्गापूजा में लगाए गए ‘वाम वध’ के पोस्टर के जवाब में अब हिटलर की तस्वीर वाला एक पोस्टर सामने आया है। इस पोस्टर को लेकर इलाके में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
107 साल पुरानी पूजा में ‘वाम वध’ की थीम
कामारडांगा जनरल दुर्गोत्सव समिति की इस पूजा को 107 साल पुराना बताया जा रहा है। इस बार पूजा की थीम ‘सनातन हिंदू राष्ट्र’ रखी गई है। इसके साथ ही समिति की ओर से ‘वाम वध’ का संदेश देने वाला पोस्टर भी लगाया गया है।
समिति की ओर से कहा गया है कि पूजा परिसर में CPI(M), DYFI, SUCI या अन्य वामपंथी संगठनों को बुक स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आयोजक सूरज कुमार सिंह के मुताबिक, वामपंथी संगठनों की ओर से हिंदू धर्म, संतों, सनातन धर्म और मां काली को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें कही जाती रही हैं।
इसी वजह से पूजा परिसर में वामपंथी संगठनों के स्टॉल को अनुमति नहीं देने का फैसला किया गया है।
‘वाम वध’ के सामने आया हिटलर का पोस्टर
इसी विवाद के बीच इलाके में एक दूसरा पोस्टर दिखाई दिया, जिसमें एडॉल्फ हिटलर की तस्वीर लगाई गई है। पोस्टर पर संदेश दिया गया है—“वो भी यही कहता था, बाकी इतिहास है।”
इस पोस्टर को ‘वाम वध’ के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हिटलर वाला पोस्टर किसने लगाया।
पोस्टर को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
हिटलर की तस्वीर सामने आने के बाद ‘वाम वध’ बनाम हिटलर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
एक ओर पूजा आयोजकों का कहना है कि उनका संदेश वामपंथी राजनीति और संगठनों के विरोध से जुड़ा है, वहीं दूसरे पोस्टर के जरिए इस तरह के राजनीतिक संदेशों पर ऐतिहासिक संदर्भ में सवाल उठाने की कोशिश दिखाई देती है।
हिटलर का नाम इतिहास में नाजी तानाशाही और द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा हुआ है। इसलिए उसकी तस्वीर के इस्तेमाल ने इस पोस्टर विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
पूजा से पहले पोस्टर वॉर ने बढ़ाई हलचल
कोलकाता में दुर्गापूजा के दौरान राजनीतिक संदेश और पोस्टर कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार ‘वाम वध’ और उसके जवाब में हिटलर की तस्वीर वाले पोस्टर ने विवाद को अलग रंग दे दिया है।
अब देखना यह है कि पूजा शुरू होने से पहले इस पोस्टर विवाद को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
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