कोलकाता | 22 सितंबर 2025 : कोलकाता की दुर्गा पूजा अपनी अनूठी थीम्स, भव्य पंडालों और कलात्मक प्रतिमाओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यूनेस्को ने इसे अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल कर दुनिया भर में इसकी पहचान मजबूत की। नवरात्रि के पहले दिन से ही कोलकाता के अलग-अलग इलाकों में पंडाल सजने लगे हैं।
इस वर्ष कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडालों में भाषाई प्रेम और सांस्कृतिक आत्मगौरव की अनूठी मिसाल देखने को मिली। बांग्ला भाषा को समर्पित थीम ने न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं बल्कि देश-विदेश से आए पर्यटकों का भी ध्यान आकर्षित किया।
🎨 थीम की विशेषताएँ
- पंडाल की दीवारों पर रवींद्रनाथ ठाकुर, काजी नजरुल इस्लाम, जीवनानंद दास की कविताओं को बांग्ला लिपि में उकेरा गया
- प्रवेश द्वार पर “आमार भाषा, आमार गौरब” का संदेश रोशनी में चमकता रहा
- बांग्ला वर्णमाला को कलात्मक रूप से मूर्तियों और सजावट में शामिल किया गया
- थीम सॉन्ग “बांग्ला आमार मातृभाषा” को स्थानीय गायकों ने प्रस्तुत किया, जिसने माहौल को भावनात्मक बना दिया
यह थीम बंगालियों की मातृभाषा ‘बांग्ला’ को संरक्षित और प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास है। पंडाल को पूरी तरह बांग्ला वर्णमाला से सजाया गया है, जहां चारों ओर स्वरलिपि और व्यंजन अक्षरों की चमकदार सजावट नजर आती है।
दुर्गा प्रतिमा की डिजाइन भी अनोखी है, जहां ‘मां दुर्गा’ की गोद में विराजमान ‘मां लक्ष्मी’ और ‘मां सरस्वती’ बांग्ला वर्णमाला की पुस्तकें हाथों में थामे हुए हैं, जो भाषा के माध्यम से ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है।
दुर्गा उत्सव कमेटी की सदस्य स्वागता गांगुली ने बताया कि इस बार दुर्गा पंडाल के जरिए बांग्ला भाषा को प्रमुखता से दिखाया गया है। कमेटी का उद्देश्य है कि आधुनिकता की दौड़ में युवा बंगाली अपनी भाषा से वंचित न हों और दुर्गा पूजा के माध्यम से उन तक यह संदेश पहुंचे कि अपनी भाषा को सीखना जरूरी है। इसलिए हम दुर्गा पंडाल के जरिए बांग्ला भाषा को प्रमोट कर रहे हैं।
इसके अलावा, पंडाल में भारत की महान हस्तियों की तस्वीर भी लगाई है, जिनमें गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चटर्जी भी शामिल हैं।
यह थीम नवरात्रि के भक्ति भाव को सांस्कृतिक गौरव से जोड़ती है, जहां पंडाल में बांग्ला साहित्य, कविताओं और लोकगीतों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है।
कोलकाता की सड़कों पर उत्साह चरम पर है और श्रद्धालु भी इन थीम-आधारित पंडलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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