कोलकाता हिन्दी न्यूज | 10 सितम्बर 2026: अब से अधिक बेहतर समन्वय के माध्यम से न्याय निर्णयन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव आएगा, क्योंकि ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण (डीआरएटी) और इसके अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऋण वसूली अधिकरणों (डीआरटी) को एक ही छत के नीचे लाया गया है।
यह कदम निर्णयन की रूपरेखा को मजबूत करने और बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उद्घाटन समारोह
ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण ने 8 सितंबर 2026 को कोलकाता स्थित जीवन सुधा भवन में अपने नए कार्यस्थल के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया।
अब से कोलकाता अपीलीय अधिकरण उक्त ऊँची इमारत की दसवीं मंजिल पर स्थित होगा।
इससे पहले इसका पता कोलकाता के 9, ओल्ड पोस्ट ऑफिस स्ट्रीट पर था। बैंकों और वित्तीय संस्थानों के गणमान्य व्यक्तियों ने उद्घाटन समारोह में भाग लिया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऋणों की शीघ्र वसूली की बढ़ती आवश्यकता और बैंकों की बड़ी वित्तीय हिस्सेदारी को देखते हुए 1993 में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को देय ऋणों की वसूली अधिनियम, 1993 बनाया गया, जिसका बाद में नाम बदलकर ऋण वसूली और दिवालियापन अधिनियम, 1993 कर दिया गया।
इस अधिनियम में बैंकों के ऋणों से संबंधित मुकदमों के लिए विशेष अधिकरणों की स्थापना का प्रावधान किया गया।
कानून में निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप पूरे देश में ऋण वसूली अधिकरण स्थापित किए गए और उनके शीर्ष पर अपीलीय अधिकरण रखा गया।
कोलकाता ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण का गठन वर्ष 1993 में, 24 जून 1993 को हुआ और लगभग तीन दशकों की अपनी यात्रा में इसने एक लंबा सफर तय किया है।
अधिकार क्षेत्र
कोलकाता ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण अपने कानूनी और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुवाहाटी सहित सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों के ऋण वसूली अधिकरणों द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध दायर अपीलों की सुनवाई करता है।
आज कोलकाता अपीलीय अधिकरण न केवल ऋण वसूली अधिकरण-एक, दो और तीन के कार्यों की निगरानी करता है, बल्कि इसका अधिकार क्षेत्र कटक, गुवाहाटी, हैदराबाद, विशाखापट्टनम और सिलीगुड़ी के ऋण वसूली अधिकरणों तक भी विस्तृत है।
अध्यक्ष का नेतृत्व
माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में कोलकाता अपीलीय अधिकरण ऋणों की वसूली को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण और जटिल कानूनी प्रश्नों पर सुनवाई करता और उनका समाधान करता रहा है।
बैंक के हितों की spरक्षा सुनिश्चित करना और उधारकर्ता के अधिकारों को कुचले जाने से बचाना—इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना अपीलीय अधिकरण के कार्य को हमेशा जटिल और चुनौतीपूर्ण बनाता रहा है।
वकीलों और पक्षकारों को मिलेगा लाभ
अपीलीय अधिकरण का नया स्थान और सभी अधिकरणों को एक ही छत के नीचे लाने से उन वकीलों और अधिवक्ताओं के लिए कार्य करना काफी आसान होगा,
जो बैंक और ऋण-संबंधी मुकदमों को अपनी विशेष विशेषज्ञता के क्षेत्र के रूप में देखते हैं और अधिकरणों तथा अपीलीय अधिकरण को न्यायनिर्णयन में अपना सर्वोत्तम सहयोग प्रदान करते हैं।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।


