कोलकाता हिन्दी न्यूज | 04 सितम्बर 2026: कोलकाता में साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी नागरिकों को फोन कर कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी करने के आरोप में पुलिस ने बेनियापुकुर लेन स्थित एक फ्लैट से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, फ्लैट में अवैध रूप से एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था, जहां से विदेशों में बैठे लोगों को निशाना बनाया जाता था।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से 10 लाख 10 हजार रुपये नकद, पांच मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, एक टैब और छह चेकबुक समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की जांच की जा रही है।
‘पेपल कर्मचारी’ बनकर अमेरिकी नागरिकों को करते थे फोन
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद अनस, अयान हुसैन और सैयद जायेद के रूप में हुई है। आरोप है कि तीनों खुद को अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन भुगतान कंपनी ‘पेपल’ का कर्मचारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करते थे।
जांचकर्ताओं का दावा है कि आरोपी वीओआईपी कॉल के जरिए लोगों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान उन्हें किसी समस्या का हवाला देकर भरोसे में लिया जाता और फिर उनके कंप्यूटर या अन्य डिजिटल डिवाइस तक रिमोट एक्सेस हासिल करने की कोशिश की जाती थी।
रिमोट एक्सेस के जरिए संवेदनशील जानकारी हासिल करने का आरोप
पुलिस का आरोप है कि ठग विभिन्न रिमोट कंप्यूटर एक्सेस एप्लिकेशन की मदद से पीड़ितों के कंप्यूटर या अन्य डिवाइस तक पहुंच बनाते थे। इसके बाद वहां मौजूद बैंकिंग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा हासिल किया जाता था।
जांचकर्ताओं को आशंका है कि इसी जानकारी का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों के खातों से कथित तौर पर पैसे निकालने या उन्हें दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
10.10 लाख रुपये नकद समेत सामान बरामद
पुलिस ने जिस फ्लैट पर छापेमारी की, वहां से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय दस्तावेज मिले हैं।
बरामद सामान में शामिल हैं:
- 5 मोबाइल फोन
- 4 लैपटॉप
- 1 टैब
- 6 चेकबुक
- 10 लाख 10 हजार रुपये नकद
- कई संदिग्ध और महत्वपूर्ण दस्तावेज
पुलिस अब इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। इससे कथित साइबर ठगी के नेटवर्क और पैसों के लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
कितने लोगों को बनाया निशाना? जांच में जुटी पुलिस
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अब तक कितने अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बना चुके हैं और इस कथित गिरोह ने कुल कितने रुपये की ठगी की है।
साथ ही जांच का दायरा उन बैंक खातों और पेमेंट गेटवे तक भी बढ़ाया जा रहा है, जिनके जरिए कथित तौर पर ठगी की रकम को ट्रांसफर किया जाता था।
फर्जी कॉल सेंटर के पीछे कौन-कौन?
पुलिस को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क में गिरफ्तार तीन आरोपियों के अलावा और भी लोग शामिल हो सकते हैं। अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर कथित गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बेनियापुकुर के इस फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर कब से संचालित हो रहा था और इसके पीछे किसका मुख्य हाथ था।
विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर कोलकाता से चलाए जा रहे कथित साइबर ठगी के ऐसे नेटवर्क पर पुलिस की कार्रवाई से एक बार फिर साफ है कि साइबर अपराध का दायरा लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैल रहा है।
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