कोलकाता | 30 जनवरी 2026: कोलकाता के आनंदपुर इलाके में हुए भीषण अग्निकांड में मृतकों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। मंगलवार को इलाज के दौरान एक और व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके बाद यह आंकड़ा और बढ़ गया।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के सूत्रों के अनुसार, अब भी कई लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
26 जनवरी की सुबह गोदाम में लगी थी आग
यह हादसा 26 जनवरी की सुबह हुआ था, जब आनंदपुर स्थित एक गोदाम में अचानक आग लग गई। उस वक्त गोदाम के अंदर कई मजदूर सो रहे थे, जो आग की चपेट में आ गए। आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।

आग कहां से लगी? जांच में विरोधाभास
राज्य अग्निशमन सेवा विभाग और फोरेंसिक टीम की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि आग ‘वाओ मोमो’ फैक्ट्री से नहीं, बल्कि पास में स्थित पुष्पांजलि डेकोरेटर के गोदाम से शुरू हुई थी।
हालांकि, इस मामले में गिरफ्तार किए गए पुष्पांजलि गोदाम के मालिक गंगाधर दास ने दावा किया है कि आग सबसे पहले मोमो फैक्ट्री से फैली, जिसके बाद पूरे इलाके में फैल गई। आग के स्रोत को लेकर प्रशासनिक जांच अब भी जारी है।
NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान
इस घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर तत्काल कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
NHRC ने कहा कि आनंदपुर स्थित वाओ मोमो फैक्ट्री में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों वाली शिकायत मिलने के बाद यह कदम उठाया गया।
‘आपराधिक लापरवाही’ का आरोप
NHRC की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि—
- कंपनी प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही
- राज्य अग्निशमन सेवाओं की नियामक विफलता
- श्रम विभाग, शहरी नियोजन अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही इस हादसे के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है।
बयान में कहा गया, “फैक्ट्री अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत प्रावधानों के गंभीर उल्लंघन के संकेत मिले हैं। शिकायत में लगाए गए आरोप पहली नजर में पीड़ितों के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं।”
आनंदपुर में विरोध रैली करेंगे सुवेंदु अधिकारी
इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आनंदपुर इलाके में विरोध रैली आयोजित करने की घोषणा की है।
शुरुआत में पुलिस ने रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ रैली की अनुमति दे दी। भाजपा का आरोप है कि यह हादसा सरकारी लापरवाही और नियमों की खुलेआम अनदेखी का नतीजा है।
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