जाने कौन सा पूजन- अनुष्ठान किस कामना के लिए किया जाना चाहिए?

1. बटुक भैरव स्त्रोत्र : इस स्त्रोत्र के पाठ करने मात्र से महामारी राजभय अग्निभय चोरभय उत्पात भयानक स्वप्न के भय में घोर बंधन में इस बटुक भैरव का पाठ अति लाभदाई है तथा हर प्रकार की सिद्धी हो जाती है इस प्रयोग का कम से कम 108 पाठ करना चाहिए।

2. श्रीसूक्त प्रयोग : श्रीसूक्त प्रयोग एक ऐसा प्रयोग है जिससे लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर घर में स्थिर रूप से निवास करती है। इसके 1100 आवृति (पाठ) कराने पर विशेष लाभहोता है।

3. श्रीकनकधारा स्तोत्र : यह स्तोत्र आद्य शंकराचार्य जी द्वारा रचित है। जिसके पाठ से स्वर्ण वर्षा हुई थी।
कनकधारा स्तोत्र के पाठ करवाने से घर ऑफिस व्यापार स्थल में उत्तरोत्तर वृद्धि होती रहती है। कनकधारा में कमला प्रयोग से अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है।

4. श्रीमदभागवत गीता : यह महाभारत के भीष्म पर्व से लिया गया है। इसमें भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को आत्मज्ञान दिया तथा कर्म में लगे रहने के विषय में बतलाया है। इसके पाठ करवाने से घर में शांति सुख व् समृद्धि आती है तथा सभी दोष पाठ मात्र से नष्ट होते है यह अत्यंत लाभकारी है।

5. श्रीअखंड रामचरित मानस पाठ : यह तुलसीदास द्वारा रचित है। इस मानस में सात कांड है। जिसका पारायण (पाठ) अनवरत है। इसलिए इसे अखंड पाठ कहते है। यह 20 से 25 घंटे में पूर्ण होता है। मानस पाठ से घर मे काफी शांती तथा यश व कीर्ति बढती है तथा मनुष्य सही नीति से चलता है।

6. सुंदरकांड पाठ : सुंदरकांड पाठ तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस से लिया गया है। इस पाठ से हनुमान जी को प्रसन्न किया जाता है विशेषतः शनि के प्रकोप को शांत करने के लिये सुंदरकांड का पाठ लाभदायक होता है, वैसे कम से कम 108 पाठ ब्राह्मण के द्वारा करवाया जाता है।

7. हनुमान चालीसा : हनुमान चालीसा कलियुग मे मनुष्य के जीवन का आधार है। इसका पाठ प्रायः प्रतिदिन किया जाता है। परंतु विशेष रूप से 41 दिन मे प्रतिदिन 100 पाठ कराने से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए किये गया सभी अनुष्ठान पूर्ण होता है।

8. बजरंग बाण : बजरंग बाण के पाठ से मनुष्य स्वयं सुरक्षित रहता है। इसका कम से कम 52 पाठ करके हवन करने पर विशेष लाभ प्राप्त होता है।

9. हरि कीर्तन (हरे राम हरे कृष्ण) : प्रभू कि कृपा प्राप्ति तथा घर मे आनंद एवं सुख के लिये तथा सन्मार्ग प्राप्ति के लिये हरि किर्तन करवाया जाता है।

10. श्रीसुंदर कांड (वाल्मिकी रामायण) : वाल्मिकी रामायण के सुंदर कांड का पाठ करने से संतान बाधा दूर होती है तथा इसके प्रयोग से सारी कठिनाइय समाप्त हो जाती है। वाल्मिकी द्वारा रचित सुंदर कांड एक याज्ञिक प्रयोग है। इस पाठ का 108 पाठ विशेषतः हवनात्मक रूप से लाभ दायक है।

11. श्रीललिता सहस्त्र नामावली : ललिता सहस्त्र नाम अर्थात दुर्गा माताकि प्रतिमूर्ती है। इस सहस्त्र नाम के पाठ से अर्चन व अभिषेक तथा हवन करने से विशेषतः रोग बाधा दूर होता है।

12. श्रीशिव सहस्त्र नामावली : शिव सहस्त्र नामावली के कई प्रयोग है। इस प्रयोग से कई लाभ मिलते है। सहस्त्र नामावली के द्वारा अर्चन व अभिषेक तथा हवन प्रयोग से अपार शांति मिलती है।

13. श्री हनुमत सहस्त्र नामावली : श्री हनुमत सहस्त्र नामावली के प्रयोग से विशेषतः शनि शांती होती है।

14. श्री शनि सहस्त्र नामावली : शनि के प्रकोप या शनि कि साढेसाती या अढ्या चाल रही हो तो शनि सहस्त्रनाम का प्रयोग किया जाता है।

15. श्रीकात्यायनी देवी जप : जिस किसी भी कन्या के विवाह मे बाधा आ रही हो या विलंब हो रहा हो तो कात्यायनी देवी का 41000 मंत्र का जप केले के पत्ते पर ब्राह्मण पान खाकर जप करता है, तो उस कन्या के विवाह मे आनेवाली सभी बाधाये दूर हो जाती है। यह अनुष्ठान 21 दिन मे पूर्ण हो जाता है। यह प्रयोग अनुभव सिद्ध है।

16. श्रीगोपाल सहस्त्र नाम : जब किसी भी दंपती को पुत्र या संतान कि प्राप्ती न हो रही हो तो, वह सदाचार तथा धार्मिक पुत्र कि प्राप्ति के लिये गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करावे। गोपाल मंत्र का सवा लाख जप पुत्र प्राप्ति मे अत्यंत लाभदायक है। यह प्रयोग अनुभूत है।

17. श्रीहरिवंश पुराण : श्रीहरिवंश पुराण कथा का श्रवण अत्यंत प्रभावी होता है। जिस किसी भी परिवार मे
संतान न उत्पन्न हो रहा हो तो इस पुराण के पारायण (पाठ) से घर मे संतान उत्पत्ती होती है। यह अनुभूत है तथा, यह 7 दिन का कार्यक्रम होता है।

18. श्रीशिव पुराण : श्रीशिव पुराण मे शिव जी के महिमा का ही विशेष वर्णन है तथा उनके सभी अवतारों का वर्णन किया गया है। यह श्रावण मास या पुरुषोत्तम मास मे विशेष रूप से पाठ बैठाया जाता है।

19. श्रीदेवी भागवत : श्रीदेवी भागवत मे भी 18000 श्लोक है तथा यह माता जी के प्रसन्नता के लिये किया जाता है। यह प्रयोग नवरात्र या विशेष पर्व पर किया जाता है।

20. श्रीगणपती पूजन एवं अभिषेक : किसी भी शुभ अवसर पर यह पूजन किया जा सकता है। इससे सभी बाधाये दूर हो जाती है तथा कार्य मे उत्तरोत्तर वृद्धि होती है।

21. भूमि पूजन, आफिस एवं दुकान उदघाटन : भूमि पूजन एवं दुकान उदघाटन उस भूमि पर कार्य शुरू करने के पूर्व वहा का भूमि पूजन सम्पन्न किया जाता है। जिससे वहा किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो और कार्य आसानी से सम्पन्न हो जाय।

पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री

जोतिर्विद वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
9993874848

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