वाराणसी। इस वर्ष सन् 2025 ई. आश्विन शरद् नवरात्र 22 सितम्बर (सोमवार) से प्रारंभ हो रहे हैं। आश्विन शरद् नवरात्र के विषय में पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री जी ने बताया कि घटस्थापना/कलश स्थापना, ज्योति प्रज्वलन तथा देवी दुर्गा की साख लगाने के लिए 22 सितम्बर सोमवार सुबह 06:25 बजे के बाद पूरा दिन शुभ मुहूर्त रहेगा। किंतु यदि संभव हो तो सुबह-सुबह ही सभी कार्य कर लेने चाहिए। यदि राहुकाल का विचार करें तो सोमवार सुबह 07:40 से 09:11 तक राहुकाल रहेगा।
जानिए अपनी राशि अनुसार पूजन विधि :
मेष राशि : शिव आराधना करें। स्कंद माता की विशेष पूजा करें। माता को लाल चंदन, लाल पुष्प और सफेद मिष्ठान अर्पण करें।
वृष राशि : “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें। माता के महागौरी स्वरूप की पूजा करें। पंचमेवा, सुपारी, सफेद चंदन और सफेद पुष्प चढ़ाएं।
मिथुन राशि : श्रीसूक्तम् का प्रतिदिन 11 पाठ करें। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। केला, पुष्प और धूप से माता का पूजन करें।
कर्क राशि : श्रीगणेश चालीसा का पाठ करें। माता शैलपुत्री का पूजन करें। सफेद बताशे, चावल, दूध और दही अर्पण करें।
सिंह राशि : आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। मां कुष्मांडा का पूजन करें। तांबे के पात्र में रोली, चंदन, केसर, कपूर से आरती करें।
कन्या राशि : दुर्गा चालीसा का प्रतिदिन 7 बार पाठ करें। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। फल और गंगाजल अर्पण करें।
तुला राशि : रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें। माता महागौरी का पूजन करें। दूध, दही, चावल, चुनरी चढ़ाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें।
वृश्चिक राशि : शिव पूजन एवं रुद्राभिषेक करें। स्कंदमाता का पूजन करें। लाल फूल, गुड़, चावल और लाल चंदन अर्पण करें।
धनु राशि : गुरु चरित्र का पाठ करें। गुरु पूजन करें। माता चंद्रघंटा का पूजन करें। हल्दी, केला, केसर, पीले वस्त्र, तिल का तेल और पीले पुष्प अर्पित करें।
मकर राशि : गायत्री मंत्र का जाप करें। माता कालरात्रि का पूजन करें। सरसों के तेल का दीपक, पुष्प, चावल, कुमकुम और सूजी का हलवा अर्पित करें।
कुंभ राशि : सुंदरकांड का पाठ करें। मां कालरात्रि का पूजन करें। पुष्प, कुमकुम, तेल का दीपक और ऋतु-फल अर्पण करें।
मीन राशि : “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” एवं माता बगलामुखी मंत्र का जाप करें। मां चंद्रघंटा का पूजन करें। हल्दी, दूध, चावल, पीले फूल और केले अर्पित करें।
नवरात्र में ध्यान रखने योग्य बातें :
तामसिक वस्तुओं का सेवन न करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
शराब, नशा आदि से दूर रहें।
व्रत के दौरान दाढ़ी-मूंछ और बाल/नाखून न काटें।
पूजा के समय बेल्ट, चप्पल-जूते या चमड़े की वस्तुएँ न पहनें।
काले रंग के वस्त्र न पहनें।
यदि कलश स्थापना एवं अखंड ज्योति की है तो घर खाली न छोड़ें।
इन दिनों नींबू काटना अशुभ माना गया है।
विष्णु पुराण के अनुसार नवरात्र में दोपहर में न सोएँ तथा रात्रि में भूमि पर ही शयन करें।
किसी का दिल दुखाना सबसे बड़ी हिंसा मानी गई है।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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