वाराणसी। महालक्ष्मी व्रत उद्यापन के विषय में पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री जी ने बताया कि – पूजा की तैयारी अर्थात उद्यापन वाले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें तथा घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।
📌 चौकी को गंगाजल से शुद्ध करें और माता जी को रोली, चंदन, हल्दी, केसर, फूल, अक्षत, लौंग, इलायची, पान-सुपारी, नारियल अर्पित करें।
📌 16 दीप जलाएं और विधिवत पूजा-अर्चना करें।
📍भोग और प्रसाद :
📌 माँ लक्ष्मी को खीर, पूड़ी, हलवा, गुड़-चना और मौसमी फल का भोग लगाएं।
📌 16 प्रकार की वस्तुएं (फल, मिठाई, पकवान) अर्पित करना शुभ माना जाता है।
📌 भोग के लिए बनाई गई खीर का एक हिस्सा अलग निकाल कर रखें।

📍महिला भोज (मुख्य उद्यापन) :
📌 उद्यापन से एक दिन पहले ही 5 से 7 (या अपनी क्षमतानुसार) विवाहित महिलाओं (सुहागन) को भोजन के लिए आमंत्रित करें।
📌 उद्यापन वाले दिन, पूजा के बाद इन महिलाओं को शुद्ध सात्विक भोजन (पूरी, सब्जी, हलवा, खीर) कराएं।
📌 भोजन कराने के बाद, प्रत्येक महिला को दक्षिणा के रूप में कुछ रुपये, एक कटोरी खीर और श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक दें।
📌 उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और उन्हें विदा करें।
📍 व्रत का धागा या रक्षा सूत्र :
📌 पूजा के बाद, व्रत का डोरा/रक्षा सूत्र (जो आप हाथ में बांधते हैं) को माँ को स्पर्श कराकर, सूप में रखकर चौकी पर ही रहने दें (अगले दिन तक)
📌 अगले दिन इस डोरे को अपनी कलाई पर बांध लें, फिर बाद में भूमि विसर्जन या जल विसर्जन कर सकते हैं।
📌 व्रत खोलना : उद्यापन और महिलाओं को भोजन कराने के बाद अगले दिन व्रत खोला जाता है।
📍मुख्य बातें :
📌 उद्यापन हमेशा शुक्रवार को ही करें।
पूरे 16 शुक्रवार व्रत रखने के बाद उद्यापन किया जाता है।
📌 उद्यापन के दिन खट्टी चीजों और मांसाहार से परहेज करें।
📌 मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848

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